सेवानिवृत्त न्यायिक अधिकारियों की पेंशन बहाली पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और राज्यों से जवाब मांगा

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को केंद्र और सभी राज्य सरकारों से जवाब मांगा है कि सेवानिवृत्त न्यायिक अधिकारियों को उनकी पूर्ण पेंशन तुरंत बहाल क्यों न की जाए, जब सरकार द्वारा लिया गया समेकित (commuted) पेंशन राशि और उस पर ब्याज पूरी तरह वसूल हो चुका हो। वर्तमान व्यवस्था के अनुसार पूर्ण पेंशन 15 वर्ष बाद ही बहाल की जाती है।

मुख्य न्यायाधीश बी.आर. गवई, और न्यायमूर्ति के. विनोद चन्द्रन तथा न्यायमूर्ति एन.वी. अंजनिया की पीठ ने अधिवक्ता गोपाल झा की दलीलों पर गौर किया, जो अखिल भारतीय सेवानिवृत्त न्यायाधीश संघ (AIRJA) की ओर से पेश हुए। उन्होंने कहा कि मौजूदा नीति सेवानिवृत्त न्यायिक अधिकारियों के लिए हानिकारक है और उन्हें आर्थिक रूप से नुकसान पहुंचाती है।

AIRJA, जिसके अध्यक्ष पूर्व न्यायाधीश एन. सुकोमारन हैं, ने यह याचिका 2015 से लंबित एक मामले के तहत दायर की है, जो न्यायिक अधिकारियों की सेवा शर्तों और पेंशन लाभों से संबंधित है।

संघ ने कहा कि सेवानिवृत्ति के समय न्यायिक अधिकारी एकमुश्त राशि प्राप्त करने के लिए पेंशन का एक हिस्सा समेकित कराते हैं ताकि मकान, बच्चों की शिक्षा या विवाह जैसी तात्कालिक जरूरतें पूरी की जा सकें। यह राशि सरकार बाद में मासिक पेंशन से किस्तों में काटकर वसूल करती है।

लेकिन, याचिका के अनुसार, सरकार मूलधन और 8% वार्षिक ब्याज की पूरी राशि 11 वर्षों से भी कम समय में वसूल कर लेती है। इसके बावजूद कटौती 15 वर्ष तक जारी रहती है, जिससे अतिरिक्त वसूली हो जाती है।

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AIRJA ने उदाहरण देकर बताया कि जे7 स्तर पर सेवानिवृत्त अधिकारी को लगभग ₹51.94 लाख की एकमुश्त राशि मिलती है। 8% ब्याज सहित कुल देयता लगभग ₹69.13 लाख होती है, लेकिन 15 वर्षों की कटौती के दौरान सरकार करीब ₹95.08 लाख वसूल लेती है — यानी लगभग ₹26 लाख की अतिरिक्त वसूली।

याचिका में कहा गया, “इस पद्धति से पेंशनभोगियों को ऐसी रकम चुकानी पड़ती है, जो उन्होंने कभी प्राप्त ही नहीं की।” संघ ने अदालत से ऐसे सभी सरकारी आदेशों, परिपत्रों और नियमों को निरस्त करने की मांग की है, जिनमें 15 वर्षों तक कटौती का प्रावधान है।

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याचिका में द्वितीय न्यायिक वेतन आयोग की सिफारिशों का भी हवाला दिया गया, जिसमें कहा गया था कि ब्याज सहित पूरी राशि सामान्यत: 11 वर्षों में वसूल हो जाती है और 12 वर्षों से अधिक कटौती जारी रखना अनुचित है।

पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा, “केंद्र और सभी राज्यों को नोटिस जारी किया जाए।” अब सरकारों के जवाब आने के बाद सुप्रीम कोर्ट इस मुद्दे पर आगे विचार करेगा।

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