सिर्फ डिफॉल्टर बिल्डरों को मदद कर रहा RERA, इसका पुनरावलोकन करें सभी राज्य: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने बृहस्पतिवार को रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटीज़ (RERA) के कार्यों को लेकर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि यह संस्थान अब अपने वास्तविक उद्देश्य से भटक गया है और केवल डिफॉल्टर बिल्डरों की मदद कर रहा है।

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ ने कहा:

“सिर्फ डिफॉल्ट करने वाले बिल्डरों को मदद पहुंचाने का काम कर रही है यह संस्था। बेहतर होगा इसे समाप्त कर दिया जाए, हमें कोई आपत्ति नहीं।”

यह टिप्पणियां हिमाचल प्रदेश सरकार की उस याचिका पर सुनवाई के दौरान आईं जिसमें उच्च न्यायालय द्वारा RERA कार्यालय को शिमला से धर्मशाला स्थानांतरित करने के आदेश पर रोक लगाने को चुनौती दी गई थी।

शीर्ष अदालत ने 30 दिसंबर 2025 को पारित हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के अंतरिम आदेश पर रोक लगाते हुए कहा:

“राज्य सरकार को RERA कार्यालय अपनी पसंद के स्थान पर स्थानांतरित करने की अनुमति दी जाती है। हालांकि यह आदेश उच्च न्यायालय में लंबित याचिका के अंतिम निर्णय के अधीन होगा।”

जब पीठ को बताया गया कि RERA में एक सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी को नियुक्त किया गया है, तो मुख्य न्यायाधीश ने तीखी टिप्पणी की:

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“हर राज्य में ये संस्थाएं अब रिटायर्ड अफसरों का पुनर्वास केंद्र बन गई हैं। जिन लोगों के लिए यह संस्था बनी थी, वे पूरी तरह से निराश और हताश हैं। उन्हें कोई प्रभावी राहत नहीं मिल रही है।”

उन्होंने यह भी कहा कि धर्मशाला या पालमपुर जैसे क्षेत्रों के विकास के लिए पर्यावरण-संवेदनशील आर्किटेक्ट जैसे विशेषज्ञों की जरूरत है, न कि सेवानिवृत्त अफसरों की।

हिमाचल सरकार ने प्रशासनिक जरूरतों और शिमला शहर की भीड़ को कम करने के उद्देश्य से RERA कार्यालय को धर्मशाला स्थानांतरित करने का निर्णय लिया था। वरिष्ठ अधिवक्ता माधवी दीवान ने राज्य की ओर से यह दलील पेश की।

इसके जवाब में प्रतिवादी पक्ष ने तर्क दिया कि RERA के 90% प्रोजेक्ट और 92% शिकायतें शिमला, सोलन, परवाणू और सिरमौर जिलों से संबंधित हैं जो शिमला से 40 किमी के दायरे में हैं, जबकि धर्मशाला में मात्र 20 प्रोजेक्ट हैं।

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शीर्ष अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि जिन लोगों को RERA के आदेशों के विरुद्ध अपील करनी है, उन्हें शिमला न जाना पड़े, इसके लिए अपील की सुनवाई का स्थान भी बदला जाए:

“यह सुनिश्चित करने के लिए कि RERA के आदेशों से प्रभावित व्यक्तियों को शिमला जाकर अपील दायर करने में असुविधा न हो, अपीलीय अधिकार जिला एवं सत्र न्यायाधीश, शिमला से धर्मशाला स्थानांतरित किए जाएं।”

इससे पहले 9 फरवरी को एक अन्य मामले में सुप्रीम कोर्ट ने ओबीसी आयोग को शिमला से धर्मशाला स्थानांतरित करने के राज्य सरकार के फैसले पर हाईकोर्ट द्वारा लगाई गई रोक को हटाते हुए कहा था कि ऐसे प्रशासनिक फैसले नीतिगत मामले हैं और सामान्यतः न्यायिक समीक्षा के दायरे में नहीं आते।

सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियां देशभर में RERA की प्रभावशीलता पर गंभीर सवाल खड़ा करती हैं। यह संस्था 2016 के रियल एस्टेट (विनियमन और विकास) अधिनियम के तहत बनाई गई थी ताकि घर खरीदारों को राहत मिल सके और प्रोजेक्ट्स में पारदर्शिता सुनिश्चित हो।

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लेकिन कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि RERA अपने उद्देश्य में विफल हो रही है, तो राज्यों को इसकी पुनर्संरचना या गठन पर फिर से विचार करना चाहिए।

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