कॉमेडी शो ‘इंडियाज गॉट लेटेंट’ में दिव्यांगजनों पर की गई आपत्तिजनक और असंवेदनशील टिप्पणियों के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कॉमेडियन समय रैना और चार अन्य कलाकारों के खिलाफ दर्ज सभी एफआईआर रद्द कर दी हैं।
चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अगुआई वाली पीठ ने समय रैना, विपुल गोयल, बलराज घई, सोनाली ठक्कर और निशांत तंवर को राहत देते हुए मामलों को बंद करने का आदेश दिया। अदालत ने पाया कि इन पांचों कलाकारों ने दिव्यांग व्यक्तियों के प्रति समाज में संवेदनशीलता और सम्मान का भाव बढ़ाने के लिए सकारात्मक प्रयास किए हैं।
जागरूकता प्रयासों के बाद मिली कानूनी राहत
सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि आरोपी कलाकारों द्वारा दिव्यांगजनों के प्रति जागरूकता फैलाने की पहल को देखते हुए उनके खिलाफ चल रही आपराधिक कार्यवाहियों को आगे जारी रखने की आवश्यकता नहीं है। इसके साथ ही सभी संबंधित थानों और अदालतों में लंबित एफआईआर को निरस्त कर दिया गया।
अदालत का सख्त रुख और माफी के निर्देश
इससे पहले पिछले वर्ष अगस्त में अदालत ने शो के होस्ट समय रैना और उनके सह-कॉमेडियनों को दुर्लभ आनुवंशिक विकारों से पीड़ित लोगों का मजाक उड़ाने के लिए बिना शर्त माफी मांगने का निर्देश दिया था।
अदालत ने चेतावनी देते हुए रैना से कहा था कि वे अपने पॉडकास्ट आदि पर जाकर सार्वजनिक रूप से माफी मांगें और यह बताएं कि वे कितना जुर्माना या लागत सहने के लिए तैयार हैं। चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने सुनवाई के दौरान टिप्पणी की थी कि पश्चाताप की गंभीरता अपराध के स्तर से अधिक होनी चाहिए, जो अवमानना से मुक्त होने की प्रक्रिया के समान है।
याचिका और पूर्व घटनाक्रम
यह मामला ‘एसएमए क्योर फाउंडेशन’ की याचिका पर शुरू हुआ था, जिसमें कलाकारों पर दिव्यांगजनों के संबंध में असंवेदनशील चुटकुले बनाने का आरोप लगाया गया था। इससे पूर्व 5 मई को अदालत ने रैना सहित पांचों इंफ्लुएंसर्स और कॉमेडियनों को समन जारी किया था और स्पष्ट किया था कि किसी भी वर्ग को नीचा दिखाने वाली बयानबाजी पर कड़ी न्यायिक समीक्षा की जाएगी।
यह घटनाक्रम ‘इंडियाज गॉट लेटेंट’ में यूट्यूबर रणवीर अल्लाहबादिया की अन्य आपत्तिजनक टिप्पणियों को लेकर पैदा हुए विवाद के बाद सामने आया था।

