यौन शोषण मामले में राखी बंधवाने की शर्त पर जमानत देना निंदनीय: सुप्रीम कोर्ट

नई दिल्ली—- सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के उस आदेश को सिरे से अस्वीकृत कर दिया है जिसमे यौन उत्पीड़न के मामले में आरोपी को जमानत के एवज में पीड़िता से राखी बंधवाने की शर्त रखी गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने यौन अपराधों से जुड़े मामलों में पर सुनवाई के दौरान जजों के पालन के लिए कई दिशा निर्देश जारी की हैं। कोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए कहा है कि कुछ रवैये जैसे की पीड़िता की पूर्व सहमति,गड़बड़ व्यवहार,कपड़ा और इस तरह की अन्य बातें न्यायिक फैसले में नही आनी चाहिए। 

एमपी हाई कोर्ट के निर्णय को किया रदद—- सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला एमपी हाई कोर्ट के खिलाफ नौ नागरिकों द्वारा दाखिल याचिका पर दिया है। हाई कोर्ट ने आने फैसले में आरोपी को जमानत देने के लिए पीड़िता से राखी बंधवाने की विचित्र शर्त रखी थी। जिसका आम जनता ने कड़ा विरोध किया था।

सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल करने वाले नागरिकों ने सभी कोर्ट को जमानत के लिए अप्रासंगिक,असामान्य, औऱ अवैध शर्त लगाने से बचने का निर्देश देने का अनुरोध किया था।जस्टिस  एएम खानविलकर और जस्टिस एस रविंद्र भट्ट की पीठ ने हाई कोर्ट के आदेश को निरस्त करते हुए कहा “यह कोर्ट कहती है कि वैसी भाषा या तर्क जो अपराध को खत्म करती है और पीड़िता को महत्वहीन बनाती है। उससे सभी परिस्थितियों में बचा जाना चाहिए। 

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