भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण फैसले में यह स्पष्ट किया है कि अदालत में किसी भी वकील द्वारा दी गई प्रतिबद्धता (अंडरटेकिंग) मुवक्किल की सहमति और निर्देशों के बिना नहीं हो सकती। यह निर्णय स्मृति लावण्या सी एवं अन्य बनाम विट्टल गुरुदास पाई एवं अन्य (CA No. 13999/2024, SLP(C) No. 13875/2021) के मामले
