डीजीपी को हत्या के आरोपी विधायक के पति को गिरफ्तार करने का अंतिम मौक़ा: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने एमपी राज्य के दमोह में हुई कांग्रेस नेता देवेंद्र चौरसिया की हत्या के प्रकरण में राज्य पुलिस महानिदेशक को आरोपी विधायक के पति को अरेस्ट न कर पाने और 12 मार्च के आदेश का पालन न कर पाने पर जमकर फटकार लगाई है। 

जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस एमआर शाह की बेंच ने कहा कि मध्यप्रदेश पुलिस महानिदेशक ने एक हलफनामा दाखिल किया है। जिसमे उल्लेख है कि एमपी पुलिस ने 12 मार्च 2021 के अपने आदेश के अनुपालन में प्रयत्न किए लेकिन इसके बावजूद पुलिस आरोपी को गिरफ्तार न कर पाई।

कोर्ट ने पुलिस महानिदेशक को निर्देश दिया है कि इस कोर्ट के पिछले आदेश का अनुपालन 5 अप्रैल से पहले किया जाय। साथ ही सूचीबद्ध तारीख तक आदेश के पालन में विफल हो जाने पर कोर्ट की तरफ से कार्यवाही की चेतावनी दी गई है। 

कोर्ट को पूर्व में ही सूचित किया गया है कि पहले आरोपी को पुलिस सुरक्षा दी गई थी। हालांकि राज्य के पक्षकार वकील ने कहा कि अब इसे वापस ले लिया गया है। 

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हाई कोर्ट ने जुलाई 2019 में आरोपी गोविंद सिंह की जमानत खारिज करने वाली देवेंद्र चौरसिया के बेटे की याचिका को खारिज कर दिया था। जब आरोपी ने गोविंद सिंह कथित तौर पर देवेंद्र चौरसिया की हत्या की थी। तब वह अन्य हत्या के मामलों में बाहर था।

हाई कोर्ट ने दाखिल याचिका को अनुमति प्रदान करने से स्पष्ट इनकार करते हुए निर्देश दिया था कि जांच 3 माह में पूर्ण हो जानी चाहिए। और जांच पूरी हो जाने के बाद यदि गोविंद सिंह अपराध में लिप्त पाया जाता है तो उसे तत्काल हिरासत में लिया जाय। और निर्धारित प्रक्रिया का पालन किया जाना चाहिए। कोर्ट ने कहा कि गोविंद सिंह किसी गवाहों और शिकायतकर्ता पक्षकारों को धमाकायेगा नही न तो प्रभावित किया जाएगा। 

वर्तमान वर्ष फरवरी में सक्षम एएसजे ने आरोपी की गिरफ्तारी के लिए वारंट जारी किया था। जिसके बाद एसपी समेत अन्य पुलिस अधिकारियों द्वारा उक्त न्यायाधीश को डराया गया था। और इस बाबत में जिला न्यायाधीश से शिकायत की गई थी। 

जस्टिस चंद्रचूड़ ने 12 मार्च को डीजीपी को आरोपी की गिरफ्तारी करने का निर्देश के अलावा एएसजे को सुरक्षा प्रदान करने का निर्देश देते हुए कहा कि यह जंगल राज है।

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