पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान हटाए गए नामों से जुड़ी अपीलों पर सुप्रीम कोर्ट ने संज्ञान लिया है। शीर्ष अदालत ने इलेक्शन कमीशन को निर्देश दिया है कि वह अदालत द्वारा गठित अपीलीय ट्रिब्यूनल के समक्ष अब तक निपटाए गए और फिलहाल लंबित पड़े सभी मामलों का विस्तृत ब्योरा पेश करे।
25 अगस्त को होगी अगली सुनवाई
चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने मंगलवार को कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी की याचिका पर सुनवाई के दौरान इलेक्शन कमीशन को नोटिस जारी किया। अधीर रंजन चौधरी ने अपनी याचिका में राज्य के ट्रिब्यूनल में SIR से जुड़े मामलों के जल्द से जल्द निपटारे की गुहार लगाई है। सुप्रीम कोर्ट ने इस याचिका पर आगे की सुनवाई के लिए 25 अगस्त की तारीख तय की है।
पूर्व हाईकोर्ट जजों की अगुआई में बने थे ट्रिब्यूनल
सुप्रीम कोर्ट ने इस साल 10 मार्च को दिए अपने एक आदेश में पश्चिम बंगाल की वोटर लिस्ट से बाहर किए गए लोगों की अपीलों पर सुनवाई के लिए पूर्व हाईकोर्ट जजों की अध्यक्षता में स्वतंत्र अपीलीय ट्रिब्यूनल बनाने का निर्देश दिया था। अपीलों की भारी संख्या को देखते हुए शीर्ष अदालत ने मामलों की तेजी से सुनवाई के लिए पश्चिम बंगाल, ओडिशा और झारखंड के ट्रायल कोर्ट जजों को भी इस कार्य में तैनात करने की अनुमति दी थी।
अदालत की निगरानी में हुई थी पुनरीक्षण प्रक्रिया
पश्चिम बंगाल में स्पेशल इंसेंटिव रिवीजन (SIR) की यह पूरी प्रक्रिया सुप्रीम कोर्ट की सीधी निगरानी में संपन्न कराई गई थी। तत्कालीन राज्य सरकार और इलेक्शन कमीशन के बीच अविश्वास की स्थिति तथा प्रक्रियागत गड़बड़ियों के आरोपों के बीच अदालत ने पुनरीक्षण का यह ज़िम्मा अपने पर्यवेक्षण में लिया था।

