डीजीपी नियुक्ति में देरी पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, UPSC को राज्यों के खिलाफ कार्रवाई की अनुमति

राज्यों द्वारा पुलिस महानिदेशक (DGP) की नियमित नियुक्ति में हो रही अत्यधिक देरी को गंभीरता से लेते हुए, सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) को यह अधिकार दिया कि वह इस प्रकार की देरी की सूचना सीधे शीर्ष अदालत को दे सके।

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ ने तेलंगाना राज्य के संदर्भ में UPSC को चार सप्ताह के भीतर बैठक बुलाकर राज्य के लिए डीजीपी की नियुक्ति हेतु सिफारिश करने का निर्देश दिया। कोर्ट ने कहा कि तेलंगाना में नवंबर 2017 से कोई नियमित डीजीपी नहीं है।

प्रकाश सिंह बनाम भारत सरकार मामले में सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस सुधारों के तहत 2006 में दिशा-निर्देश जारी किए थे, जिनके अनुसार राज्यों को UPSC द्वारा सूचीबद्ध तीन वरिष्ठतम आईपीएस अधिकारियों में से एक को डीजीपी नियुक्त करना अनिवार्य है। इसके अलावा, नियुक्त अधिकारी को न्यूनतम दो वर्ष का कार्यकाल देना भी अनिवार्य है।

हालांकि UPSC ने सुप्रीम कोर्ट को अवगत कराया कि कई राज्य इन निर्देशों की अनदेखी कर रहे हैं और नियमित प्रस्ताव भेजने में जानबूझकर देरी कर रहे हैं। इसके बजाय, वे कार्यवाहक डीजीपी की नियुक्ति कर रहे हैं जिससे योग्य और वरिष्ठ अधिकारियों को उचित अवसर नहीं मिल पाता।

कोर्ट ने इस पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा:

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“प्रकाश सिंह मामले में दिए गए निर्देशों की अवहेलना न हो, इसके लिए UPSC को यह अधिकार दिया जाता है कि वह पहले राज्यों को समय से प्रस्ताव भेजने के लिए पत्र लिखे। यदि प्रस्ताव नहीं भेजा जाता है तो UPSC सुप्रीम कोर्ट में आवेदन दाखिल कर सकता है।”

UPSC की ओर से बताया गया कि तेलंगाना में अंतिम नियमित डीजीपी की नियुक्ति नवंबर 2015 में हुई थी और वह नवंबर 2017 में सेवानिवृत्त हो गए। इसके बाद से अब तक कोई नियमित डीजीपी नियुक्त नहीं किया गया।

कोर्ट ने इस देरी को “गंभीर चूक” बताते हुए कहा कि इससे कई वरिष्ठ अधिकारियों की सेवानिवृत्ति हो गई या उन्हें नियुक्ति के योग्य होने के बावजूद नजरअंदाज कर दिया गया।

“बिना किसी हिचकिचाहट के हम यह स्पष्ट करते हैं कि UPSC को शीघ्र ही पैनल समिति की बैठक बुलाकर तेलंगाना के लिए डीजीपी की सिफारिश करनी चाहिए,” कोर्ट ने कहा।

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यह मामला UPSC द्वारा दायर उस याचिका से जुड़ा है जिसमें तेलंगाना हाईकोर्ट के 9 जनवरी के आदेश को चुनौती दी गई थी। हाईकोर्ट ने UPSC को कहा था कि वह राज्य सरकार द्वारा शुरू की गई प्रक्रिया को जारी रखते हुए चार सप्ताह के भीतर डीजीपी की नियुक्ति की प्रक्रिया पूरी करे।

UPSC ने सुप्रीम कोर्ट में दलील दी कि राज्य सरकार ने समयसीमा के बावजूद प्रस्ताव नहीं भेजा और यह प्रकाश सिंह दिशानिर्देशों का स्पष्ट उल्लंघन है।

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इस आदेश के जरिए सुप्रीम कोर्ट ने एक बार फिर स्पष्ट कर दिया है कि पुलिस प्रशासन में राजनीतिक हस्तक्षेप की जगह नहीं होनी चाहिए और डीजीपी की नियुक्ति जैसी संवेदनशील प्रक्रिया पारदर्शिता और वरिष्ठता के सिद्धांतों के अनुरूप ही होनी चाहिए।

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