क्या सरकार का सुप्रीम कोट की बैंच बनाने का कोई प्रस्ताव है?

सरकार ने लोकसभा में सूचित किया है कि दिल्ली राज्य के बाहर भारत के सर्वोच्च न्यायालय की अलग खंडपीठ के विचार को भारत के सर्वोच्च न्यायालय द्वारा सहमती नही दी गयी है।

कल कानून और न्याय मंत्री से लोकसभा में एक सवाल पूछा गया था कि क्या सरकार ने दक्षिणी राज्यों के लोगों की सुविधा के लिए चेन्नई, तमिलनाडु में सुप्रीम कोर्ट बेंच खोलने के लिए वकील एसोसिएशन से कोई प्रस्ताव प्राप्त किया है या नहीं, जिससे की मुकदमों का समय और खर्च कम किया जा सके।

श्री रविशंकर प्रसाद, कानून और न्याय मंत्री, ने सदन को सूचित किया कि देश के विभिन्न हिस्सों में सर्वोच्च न्यायालय की बेंचों की स्थापना के लिए विभिन्न अभ्यावेदन प्राप्त हुए हैं। विधि आयोग ने अपनी 229 वीं रिपोर्ट में यह भी सिफारिश की है कि दिल्ली में एक बेंच की स्थापना की जानी चाहिए और साथ ही साथ , चेन्नई, हैदराबाद, कोलकाता और मुंबई में बेंच स्थापित किया जाना चाहिए।

हालांकि, श्री रवि शंकर प्रसाद ने बताया कि दिल्ली के बाहर सुप्रीम कोर्ट की एक अलग बेंच के विचार को भारत के सर्वोच्च न्यायालय द्वारा सहमती नही दी गयी है।

यहाँ यह ध्यान रखना आवश्यक है कि भारत के संविधान का अनुच्छेद 130 यह प्रदान करता है कि भारत का सर्वोच्च न्यायालय दिल्ली राज्य में या ऐसे अन्य स्थानों या स्थानों पर बैठेगा, जहाँ भारत के मुख्य न्यायाधीश की मंजूरी दे।

एक और सवाल पूछा गया कि क्या न्यायपालिका में महिला न्यायाधीशों की नियुक्ति और न्यायपालिका में महिलाओं के प्रतिनिधित्व को बढ़ाने के लिए आरक्षण के कार्यान्वयन के लिए सरकार किसी प्रस्ताव पर विचार कर रही है ।

कानून और न्याय मंत्री ने सदन को सूचित किया कि वर्तमान में, सर्वोच्च न्यायालय में 2 महिला न्यायाधीश और विभिन्न उच्च न्यायालय में 78 महिला न्यायाधीश हैं। केंद्र सरकार ट्रिब्यूनल और अधीनस्थ न्यायपालिका में महिला न्यायाधीशों की संख्या का विवरण नहीं रखती है।

यह सूचित किया गया है कि उच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की नियुक्ति भारत के संविधान के अनुच्छेद 217 और 224 द्वारा नियंत्रित की जाती है, और इस प्रावधान में किसी भी वर्ग या महिलाओं सहित किसी भी जाति के लिए आरक्षण प्रदान नहीं किया गया है।

क़ानून मंत्री द्वारा बताया गया की सरकार उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायाधीशों से अनुरोध करती रही है कि न्यायाधीशों की नियुक्ति के लिए प्रस्ताव भेजते समय, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग, अल्पसंख्यकों और महिलाओं के उपयुक्त उम्मीदवारों पर उचित ध्यान दिया जाए।

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