बॉम्बे हाईकोर्ट ने तारदेव हाई-राइज़ में अवैध कब्जे पर बीएमसी को फटकार लगाई, कहा – “किसी भी अवैधता को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा”

बॉम्बे हाईकोर्ट ने गुरुवार को मुंबई की बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) को तारदेव स्थित 34 मंज़िला रिहायशी इमारत ‘विलिंगडन व्यू’ में गंभीर अनियमितताओं को लेकर कड़ी फटकार लगाई और स्पष्ट किया कि निर्माण या कब्जे में किसी भी प्रकार की अवैधता को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

मुख्य न्यायमूर्ति जी.एस. कुलकर्णी और न्यायमूर्ति आरिफ डॉक्टर की खंडपीठ उपरोक्त इमारत से संबंधित कई याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी। यह इमारत सैटेलाइट होल्डिंग्स द्वारा निर्मित ‘विलिंगडन व्यू कोऑपरेटिव हाउसिंग सोसाइटी’ है, जिसकी ऊपरी 18 मंज़िलों पर बिना वैध अधिभोग प्रमाणपत्र (Occupancy Certificate – OC) के लोग रह रहे हैं।

कोर्ट ने दो टूक कहा, “यह इमारत और मामला अब पूरे शहर की इमारतों के लिए एक उदाहरण बनेगा।” न्यायालय ने 30 जून को यह पाया था कि इस इमारत को केवल 16वीं मंज़िल तक का आंशिक OC प्राप्त है, जबकि सभी 34 मंज़िलों पर कब्जा किया गया है। इसके अलावा, कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि इमारत के पास अग्निशमन विभाग की अनापत्ति प्रमाणपत्र (NOC) भी नहीं है, जो एक गंभीर सुरक्षा चूक है।

खंडपीठ ने BMC की मंशा और कार्रवाई की प्रभावशीलता पर सवाल उठाते हुए कहा, “क्या इस मुद्दे को निगम हल्के में ले रहा है? क्या लोग अभी भी उस इमारत में रह रहे हैं? यही सबसे अहम सवाल हैं।”

कोर्ट ने नागरिक निकाय की निष्क्रियता को गंभीरता से लिया और चेतावनी दी कि यदि BMC इस पर ठोस कार्रवाई नहीं करती, तो यह माना जाएगा कि वह जानबूझकर अवैध कब्जे की अनुमति दे रही है और लोगों की जान को खतरे में डाल रही है।

READ ALSO  When arbitration agreement exist and all the requirements U/s 11 of A&C Act are fulfilled, It is necessary for the court to exercise jurisdiction: Bombay HC

कोर्ट ने जिन अनियमितताओं पर विशेष ध्यान दिया, उनमें 26वीं और 27वीं मंज़िल के बीच की स्लैब को हटाकर एक डुप्लेक्स फ्लैट बनाना शामिल है – जिसे कोर्ट ने “बेहद गंभीर अवैध निर्माण” करार दिया।

जब BMC ने स्पष्टीकरण दाखिल करने के लिए अतिरिक्त समय मांगा, तो कोर्ट ने 10 जुलाई तक जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया। कोर्ट ने स्पष्ट रूप से कहा कि BMC को यह बताना होगा कि क्या पूर्ण या आंशिक OC है और गैरकानूनी कब्जे पर क्या कार्रवाई की जाएगी।

READ ALSO  सुप्रीम कोर्ट ने पर्यावरणविद् की याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उन्हें भारत का राष्ट्रपति नियुक्त करने की माँग की गई थी

इस इमारत का निर्माण 1990 में शुरू हुआ था और 2008 से इसमें लोगों ने रहना शुरू कर दिया। वर्तमान में कुल 62 में से 50 फ्लैटों में लोग रह रहे हैं। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि 17वीं से 34वीं मंज़िल पर रहने वाले निवासी बिना OC के रह रहे हैं, जो पूरी तरह अवैध है, और उन्हें इस पर पुनर्विचार करना चाहिए।

कोर्ट ने सख्त लहजे में कहा, “हम किसी भी इमारत में किसी भी प्रकार की अवैधता को स्वीकार नहीं करेंगे। कानून को पूरे शहर में निष्पक्षता और समान रूप से लागू किया जाना चाहिए।”

READ ALSO  Bombay High Court Highlights Need for Mutual Respect Among Castes and Communities

इस मामले की अगली सुनवाई 10 जुलाई को होगी।

Law Trend
Law Trendhttps://lawtrend.in/
Legal News Website Providing Latest Judgments of Supreme Court and High Court

Related Articles

Latest Articles