मंगलवार को एक महत्वपूर्ण फैसले में, भारत के सुप्रीम कोर्ट ने कानूनी कहावत “जमानत नियम है, और जेल अपवाद है” को दोहराया, और गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) जैसे विशेष क़ानूनों के तहत भी इसकी प्रयोज्यता की पुष्टि की। अदालत ने सख्त आतंकवाद विरोधी कानून के तहत फंसे जलालुद्दीन खान को जमानत दे दी, जिसमें
