उपभोक्ता आयोग का बड़ा फैसला: आग में राख हुए पैतृक मकान के लिए ओरिएंटल इंश्योरेंस को 1.25 करोड़ रुपये चुकाने का आदेश

शिमला के जिला उपभोक्ता आयोग ने एक महत्वपूर्ण निर्णय में ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी को पीड़ित गृहस्वामी को 1.25 करोड़ रुपये की पूरी बीमित राशि का भुगतान करने का निर्देश दिया है। वर्ष 2023 में लगी भीषण आग में शिकायतकर्ता का बहुमंजिला पैतृक मकान पूरी तरह नष्ट हो गया था। आयोग ने दस्तावेज मांगने और सह-स्वामित्व के आधार पर क्लेम राशि घटाने की बीमा कंपनी की कोशिशों को खारिज करते हुए इसे सेवा में कमी और अनुचित व्यापार व्यवहार ठहराया।

आयोग के अध्यक्ष बलदेव सिंह और सदस्य निधि शर्मा की पीठ ने 2 जुलाई को यह आदेश दिया। इसके साथ ही शिकायतकर्ता को हुई मानसिक प्रताड़ना के एवज में 75,000 रुपये का मुआवजा और कानूनी कार्यवाही के खर्च के रूप में 25,000 रुपये अतिरिक्त देने का भी निर्देश दिया गया। आयोग ने कहा कि बीमा कंपनी द्वारा बार-बार कागजात मांगना केवल क्लेम के निपटारे में देरी करने की एक रणनीति थी।

भीषण अग्निकांड और बीमित राशि का विवाद

यह मामला शिमला जिले के दारोटी गांव में 2 सितंबर 2023 को हुए एक बड़े अग्निकांड से जुड़ा है। इस घटना में शिकायतकर्ता का 60 से 70 वर्ष पुराना, 30 कमरों का पैतृक घर और अंदर रखा सारा सामान जलकर स्वाहा हो गया था। इस संपत्ति का ओरिएंटल इंश्योरेंस की ‘भारत गृह रक्षा’ नीति के तहत 9 दिसंबर 2022 से 8 दिसंबर 2027 तक की अवधि के लिए 1.25 करोड़ रुपये का बीमा कराया गया था।

अग्निकांड के बाद हुए स्वतंत्र मूल्यांकनों में कुल नुकसान का आकलन पहले 2.70 करोड़ रुपये और बाद में 2.93 करोड़ रुपये लगाया गया था, जो बीमित राशि से काफी अधिक था। इसके बावजूद बीमा कंपनी ने दावे का निपटारा नहीं किया। सभी आवश्यक औपचारिकताएं पूरी करने के बाद भी राहत न मिलने पर मकान मालिक ने विधिक नोटिस भेजा और फिर उपभोक्ता आयोग की शरण ली।

READ ALSO  सीपीआई (एम) ने न्यायिक आदेशों की अवहेलना करते हुए वंचियूर कोर्ट के बाहर क्षेत्रीय सम्मेलन आयोजित किया: केरल हाईकोर्ट

बीमा कंपनी की दलीलें खारिज

आयोग के समक्ष ओरिएंटल इंश्योरेंस ने तर्क रखा कि दस्तावेज जमा न करने और नुकसान का बढ़ा-चढ़ाकर दावा करने के कारण भुगतान नहीं किया गया। कंपनी का कहना था कि उसके अपने सर्वेक्षक ने मूल्यह्रास और मलबे की कीमत काटने के बाद शुद्ध देय राशि 80.17 लाख रुपये तय की थी। इसके अलावा कंपनी ने दावा किया कि मकान के नौ सह-मालिक हैं, इसलिए शिकायतकर्ता केवल एक-नौवें हिस्से का ही हकदार है।

उपभोक्ता आयोग ने बीमा कंपनी की इन दलीलों को खारिज कर दिया। आयोग ने कहा कि स्थानीय पटवारी, तहसीलदार और दमकल अधिकारी की रिपोर्ट से स्पष्ट है कि मकान पूरी तरह तबाह हो गया था। पीठ ने कहा कि जब परिवार के अन्य सदस्यों ने शिकायतकर्ता को बीमा राशि मिलने पर अनापत्ति दर्ज करा दी थी, तब बीमा नीति जारी करने के बाद कंपनी स्वामित्व संबंधी विवाद उठाकर अपने संविदात्मक दायित्व से बच नहीं सकती।

मूल्यांकन रिपोर्ट में खामियां

READ ALSO  2020 दिल्ली दंगे: दंगा, आगजनी, चोरी के आरोपों से चार बरी

उपभोक्ता आयोग ने बीमा सर्वेक्षक की रिपोर्ट को भी स्व-विरोधी पाया। पीठ ने ध्यान दिलाया कि एक तरफ सर्वेक्षक ने नीति शर्तों के तहत संपत्ति के बढ़े हुए मूल्य को स्वीकार किया, वहीं दूसरी तरफ बिना कोई ठोस कारण बताए मनमाने ढंग से 50 प्रतिशत का मूल्यह्रास लागू कर दिया और मलबे की राशि काट ली।

आयोग ने निष्कर्ष निकाला कि बीमा अवधि के दौरान ही संपत्ति का पूर्ण नुकसान हुआ था। ऐसे में बीमा कंपनी द्वारा बार-बार कागजात मांगने की मांग अनुचित थी, इसलिए कंपनी को पूरी बीमित राशि का भुगतान करने का आदेश दिया गया।

READ ALSO  सुप्रीम कोर्ट ने विधायक अब्बास अंसारी की जमानत याचिका पर यूपी सरकार से जवाब मांगा
Ad 20- WhatsApp Banner

Law Trend
Law Trendhttps://lawtrend.in/
Legal News Website Providing Latest Judgments of Supreme Court and High Court

Related Articles

Latest Articles