सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को शंभू बॉर्डर पर 2024 में हुए किसान आंदोलन से जुड़े विवाद में गठित उच्चस्तरीय समिति को अपनी रिपोर्ट और सिफारिशें पेश करने का निर्देश दिया। अदालत ने कहा कि अब हाईवे पर यातायात सामान्य हो चुका है और अवरोध समाप्त हो गया है, इसलिए कार्यवाही समाप्त करने पर विचार किया जा सकता है।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने कहा कि शंभू बॉर्डर पर स्थिति अब सामान्य है और वाहनों की आवाजाही में कोई बाधा नहीं है। अदालत के अनुसार, समिति की संक्षिप्त सिफारिशें मिलने के बाद इस मामले को बंद किया जा सकता है।
पीठ ने स्पष्ट किया कि समिति अपनी रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में दाखिल करे और न्यायालय की अगली अनुमति तक उसकी सामग्री सार्वजनिक न की जाए।
यह पांच सदस्यीय उच्चस्तरीय समिति पूर्व पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के न्यायाधीश नवाब सिंह की अध्यक्षता में गठित की गई थी। इसे सितंबर 2024 में किसानों की मांगों के समाधान के लिए बनाया गया था। किसानों की प्रमुख मांगों में न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) को कानूनी दर्जा देने की मांग भी शामिल थी।
समिति बनाते समय सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि किसानों के मुद्दों को राजनीतिक रंग नहीं दिया जाना चाहिए और उन्हें चरणबद्ध तरीके से सुलझाने की जरूरत है।
यह मामला हरियाणा सरकार की उस याचिका के जरिए सुप्रीम कोर्ट पहुंचा था, जिसमें पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के मार्च 2024 के आदेश को चुनौती दी गई थी। हाईकोर्ट ने हरियाणा सरकार को निर्देश दिया था कि अंबाला के पास शंभू बॉर्डर पर लगाए गए बैरिकेड्स को एक सप्ताह के भीतर हटाया जाए।
फरवरी 2024 में हरियाणा सरकार ने अंबाला–दिल्ली राष्ट्रीय राजमार्ग पर बैरिकेड्स लगाए थे, जब संयुक्त किसान मोर्चा और किसान मजदूर मोर्चा ने अपनी मांगों के समर्थन में दिल्ली मार्च की घोषणा की थी और किसान 13 फरवरी 2024 से वहां डटे हुए थे।
अब जब सीमा पर यातायात पूरी तरह सामान्य हो गया है, सुप्रीम कोर्ट ने समिति की सीलबंद रिपोर्ट मिलने के बाद इस प्रकरण को समाप्त करने का संकेत दिया है।

