गुजरात में नाबालिग के साथ पुलिस हिरासत में यौन उत्पीड़न का आरोप: सुप्रीम कोर्ट 15 सितंबर को सुनवाई करेगा

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को गुजरात पुलिस पर 17 वर्षीय नाबालिग लड़के के साथ हिरासत में यौन उत्पीड़न और अमानवीय यातना के आरोप वाली याचिका पर सुनवाई के लिए 15 सितंबर की तारीख तय की।

मुख्य न्यायाधीश बी.आर. गवई और न्यायमूर्ति के. विनोद चंद्रन की पीठ ने मामले को तत्काल सुनवाई के लिए उल्लेखित किए जाने पर संज्ञान लिया। अधिवक्ता रोहिन भट्ट ने अदालत से आग्रह किया कि पीड़ित की हालत गंभीर है और मामले में तत्काल हस्तक्षेप आवश्यक है।

याचिका, जो पीड़ित की बहन द्वारा दायर की गई है, में आरोप लगाया गया है कि लड़के को 19 अगस्त को बोटाद नगर पुलिस ने सोने और नकदी की चोरी के शक में उठाया। उसे 28 अगस्त तक अवैध रूप से हिरासत में रखा गया, जबकि कानून के अनुसार उसे 24 घंटे के भीतर किशोर न्याय बोर्ड या मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया जाना चाहिए था।

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याचिका में कहा गया है कि इस दौरान नाबालिग को बेरहमी से पीटा गया और यौन उत्पीड़न किया गया, जिसमें पुलिसकर्मियों ने उसके गुदा में डंडे डाले। साथ ही, गिरफ्तारी के बाद उसका कोई चिकित्सकीय परीक्षण भी नहीं कराया गया।

याचिका में सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में विशेष जांच दल (SIT) गठित करने की मांग की गई है, जिसमें गुजरात कैडर के पुलिस अधिकारी शामिल न हों। वैकल्पिक रूप से, अदालत की निगरानी में सीबीआई जांच कराने का अनुरोध किया गया है।

अन्य प्रमुख मांगें इस प्रकार हैं:

  • भारतीय न्याय संहिता (BNS), पोक्सो कानून, किशोर न्याय अधिनियम और अन्य लागू प्रावधानों के तहत एफआईआर दर्ज की जाए।
  • बोटाद नगर पुलिस स्टेशन की अगस्त और सितंबर महीने की सभी सीसीटीवी फुटेज संरक्षित की जाए और अदालत में प्रस्तुत की जाए।
  • राज्य पुलिस नाबालिग के सभी चिकित्सकीय अभिलेख अदालत में पेश करे।
  • एम्स, नई दिल्ली की एक मेडिकल बोर्ड गठित कर पीड़ित की जांच कर रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए।
  • नाबालिग को चिकित्सा सुविधा, परामर्श और पर्याप्त मुआवजा उपलब्ध कराया जाए।
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अधिवक्ता भट्ट ने अदालत से कहा कि यह अनुच्छेद 32 की याचिका है और मामला गंभीर मानवाधिकार उल्लंघन से जुड़ा है। हालांकि, मुख्य न्यायाधीश ने कहा, “सोमवार को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करेंगे।”

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