मुंबई कबूतरखानों में कबूतरों को दाना खिलाने पर रोक: सुप्रीम कोर्ट ने बॉम्बे हाईकोर्ट के आदेश में हस्तक्षेप से किया इनकार

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को बॉम्बे हाईकोर्ट के उस आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया, जिसमें बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी) को निर्देश दिया गया है कि मुंबई के कबूतरखानों में नगर निगम के आदेशों की अवहेलना कर कबूतरों को दाना खिलाने वालों पर आपराधिक कार्रवाई की जाए।

जस्टिस जे.के. माहेश्वरी और जस्टिस विजय विष्णोई की पीठ ने कहा कि मामला अभी हाईकोर्ट में लंबित है और इसकी अगली सुनवाई 13 अगस्त को होनी है। पीठ ने कहा, “इस अदालत द्वारा समानांतर हस्तक्षेप उचित नहीं है। याचिकाकर्ता आदेश में संशोधन के लिए हाईकोर्ट का रुख कर सकते हैं।”

हाईकोर्ट, कबूतरखानों को तोड़ने के बीएमसी के कदम के खिलाफ पशुप्रेमियों और अधिकार कार्यकर्ताओं की कई याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा है। प्रारंभिक आदेश में तोड़फोड़ पर रोक लगाते हुए भी कोर्ट ने दाना खिलाने पर प्रतिबंध लगाया था। 30 जुलाई को, कोर्ट ने लगातार दाना खिलाने और नगर निगम कर्मियों को रोकने की घटनाओं का संज्ञान लेते हुए, इसे “ऐसा सार्वजनिक उपद्रव जो बीमारियां फैला सकता है और मानव जीवन को खतरे में डाल सकता है” करार देते हुए भारतीय न्याय संहिता के तहत आपराधिक मामले दर्ज करने का आदेश दिया।

इससे पहले 24 जुलाई को, कोर्ट ने चेतावनी दी थी कि कबूतरों का प्रजनन और बड़ी संख्या में उनका एक स्थान पर जमावड़ा “गंभीर सामाजिक चिंता” का विषय है और यह फैसला “बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक के सामाजिक स्वास्थ्य के व्यापक हित” में लिया गया है।

सुनवाई के दौरान बीएमसी ने चिकित्सकीय साक्ष्य प्रस्तुत करते हुए बताया कि कबूतरों की बीट और पंख से दमा, हाइपरसेंसिटिविटी न्यूमोनाइटिस और लंग फाइब्रोसिस जैसी गंभीर बीमारियां हो सकती हैं, जिनका उन्नत अवस्था में कोई इलाज नहीं है। निगम ने कहा कि कई मरीजों को तब पता चलता है जब फेफड़ों को अपूरणीय क्षति हो चुकी होती है।

वहीं, याचिकाकर्ताओं — जिनका नेतृत्व पल्लवी सचिन पाटिल कर रही थीं — ने तर्क दिया कि कबूतरों को दाना खिलाना हिंदू और जैन समुदायों में एक लंबे समय से चली आ रही धार्मिक परंपरा है, और मुंबई में ऐसे 50 से अधिक स्थान दशकों से संचालित हो रहे हैं। उनका कहना था कि स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया जा रहा है और दमे का प्रमुख कारण वाहनों का धुआं व कचरे का खुले में जलना है। उन्होंने इसके विकल्प के तौर पर बर्ड टावर बनाने का सुझाव दिया, जिससे इंसान और कबूतर सहअस्तित्व में रह सकें।

इस कार्रवाई के खिलाफ सड़क पर विरोध भी हुआ। 6 अगस्त को, दादर कबूतरखाना में सैकड़ों लोगों की पुलिस से झड़प हो गई और उन्होंने दाना खिलाने से रोकने के लिए लगाए गए तिरपाल फाड़ दिए। इससे दो दिन पहले, 1,000 से अधिक लोगों ने तब विरोध प्रदर्शन किया था जब स्थल को बांस की बल्लियों से घेरकर ढका गया था।

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