भ्रष्टाचार मामले में पंजाब के निलंबित डीआईजी हरचरण सिंह भुल्लर को सुप्रीम कोर्ट से नहीं मिली राहत, जमानत याचिका खारिज

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार, 10 अप्रैल 2026 को पंजाब पुलिस के निलंबित डीआईजी (DIG) हरचरण सिंह भुल्लर की जमानत याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया। भुल्लर को पिछले साल अक्टूबर में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने एक कथित रिश्वत और भ्रष्टाचार के मामले में गिरफ्तार किया था।

चीफ जस्टिस सूर्या कांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस विपुल एम. पांचोली की तीन सदस्यीय पीठ ने इस स्तर पर राहत देने से मना कर दिया। हालांकि, कोर्ट ने भुल्लर को यह छूट दी है कि यदि इस मामले में अगले दो महीनों के भीतर ट्रायल शुरू नहीं होता है, तो वह जमानत के लिए दोबारा पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट का रुख कर सकते हैं।

यह मामला अक्टूबर 2025 में सामने आए आरोपों से जुड़ा है। रोपड़ रेंज के डीआईजी के पद पर तैनाती के दौरान, भुल्लर पर एक निजी बिचौलिए के माध्यम से “अवैध परितोषण” (रिश्वत) मांगने का आरोप लगा था। आरोप के मुताबिक, यह रिश्वत सरहिंद पुलिस स्टेशन में दर्ज एक एफआईआर में नरम रुख अपनाने और शिकायतकर्ता के व्यवसाय के खिलाफ किसी भी दंडात्मक कार्रवाई को रोकने के बदले में मांगी गई थी।

पिछले साल 16 अक्टूबर को सीबीआई ने चंडीगढ़ में जाल बिछाया था, जहां एक सह-आरोपियों को कथित तौर पर 5 लाख रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़ा गया था। इस घटनाक्रम के बाद भुल्लर को गिरफ्तार कर निलंबित कर दिया गया था। इससे पहले जनवरी में चंडीगढ़ की एक विशेष सीबीआई अदालत ने उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी थी।

फरवरी में पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट द्वारा जमानत याचिका खारिज किए जाने के बाद भुल्लर ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। निलंबित अधिकारी की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने तर्क दिया कि उनके मुवक्किल के देश छोड़कर भागने का कोई खतरा नहीं है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि मामले में चार्जशीट और सप्लीमेंट्री चार्जशीट पहले ही दाखिल की जा चुकी है।

हाईकोर्ट की कार्यवाही के दौरान, भुल्लर के वकील ने उनके तीन दशकों से अधिक के “बेदाग सेवा रिकॉर्ड” का हवाला दिया था और दावा किया था कि उनके खिलाफ लगाए गए आरोप राजनीति से प्रेरित हैं। बचाव पक्ष का यह भी तर्क था कि याचिकाकर्ता के पास से कोई रिकवरी नहीं हुई है और पूरा मामला एक निजी व्यक्ति से हुई बरामदगी पर आधारित है।

दूसरी ओर, सीबीआई ने इन दावों का विरोध करते हुए “रिकॉर्डेड बातचीत, व्हाट्सएप डेटा और नियंत्रित कॉल” (controlled calls) का हवाला दिया। एजेंसी ने तर्क दिया कि ये सबूत पहली नजर में रिश्वत की मांग की पुष्टि करते हैं।

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सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने स्पष्ट किया कि वह फिलहाल इस याचिका पर विचार करने की इच्छुक नहीं है, लेकिन ट्रायल में देरी होने की स्थिति में याचिकाकर्ता के लिए हाईकोर्ट जाने का रास्ता खुला रखा है। हाईकोर्ट ने अपने पिछले आदेश में भुल्लर को यह स्वतंत्रता दी थी कि मामले के महत्वपूर्ण गवाहों की जांच के बाद वह विशेष अदालत में नए सिरे से जमानत के लिए आवेदन कर सकते हैं।

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