पर्यावरण मंजूरी पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, प्रोजेक्ट्स को बैकडेट से ग्रीन क्लीयरेंस देने की केंद्र की व्यवस्था रद्द

सुप्रीम कोर्ट ने बिना पूर्व पर्यावरण मंजूरी के शुरू हुई परियोजनाओं को पिछली तारीख से ग्रीन क्लीयरेंस देने वाले केंद्र सरकार के 2021 के ऑफिस मेमोरेंडम को रद्द कर दिया है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जोयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम पंचोली की तीन सदस्यीय पीठ ने सर्वसम्मति से बुधवार को यह फैसला सुनाया। अदालत ने साफ किया कि देश के पर्यावरण नियमों के तहत कोई भी काम शुरू करने से पहले मंजूरी हासिल करना ही अनिवार्य नियम है। कंपनियां पहले निर्माण कार्य शुरू करके बाद में मंजूरी का दावा नहीं कर सकतीं।

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भविष्य की मंजूरियों पर लागू होगा फैसला

प्रशासनिक स्तर पर किसी भी बड़ी अड़चन से बचने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने इस आदेश को भविष्यगामी प्रभाव से लागू करने का निर्देश दिया है। इसका मतलब है कि 2021 की नीति के तहत अब तक दी जा चुकीं बैकडेटेड पर्यावरण मंजूरियां सुरक्षित रहेंगी और उन पर इस फैसले का कोई प्रतिकूल असर नहीं पड़ेगा। शीर्ष अदालत ने पर्यावरण नियमों के उल्लंघन से जुड़ी याचिकाओं और पुनर्विचार अर्जियों पर 1 अप्रैल को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।

संसदीय कानून या अधिसूचना से ही संभव होगी छूट

पीठ ने अपने निर्णय में कहा कि कार्यकारी आदेशों या ऑफिस मेमोरेंडम के जरिए नियम तोड़ने वालों को नियमित करने का कोई स्थायी रास्ता नहीं बनाया जा सकता। हालांकि, अदालत ने यह गुंजाइश रखी है कि अगर कोई असाधारण परिस्थिति या व्यापक जनहित का मामला बनता है, तो केंद्र सरकार एक वैध वैधानिक अधिसूचना जारी करके एक सीमित समय के लिए एमनेस्टी योजना ला सकती है।

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इसके अलावा, पीठ ने स्पष्ट किया कि इस फैसले से सुप्रीम कोर्ट के अपने विशेषाधिकार प्रभावित नहीं होंगे। संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत सुप्रीम कोर्ट आवश्यकता अनुसार किसी विशेष मामले में परिस्थितियों को देखते हुए बाद में पर्यावरण मंजूरी देने का निर्णय ले सकता है।

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