सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को तिरुप्परकुंद्रम स्थित भगवान मुरुगन के प्रसिद्ध मंदिर की देखरेख भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) को सौंपने और मंदिर परिसर के दीपस्तंभ (stone pillar) पर प्रतिदिन दीप जलाने की मांग वाली याचिका पर केंद्र सरकार, तमिलनाडु सरकार और एएसआई को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
न्यायमूर्ति अरविंद कुमार और न्यायमूर्ति विपुल एम पंचोली की पीठ ने यह नोटिस हिंदू धर्म परिषद की याचिका पर जारी किया। याचिकाकर्ता ने यह भी मांग की है कि तमिल माह ‘कार्तिगई’ के पर्व पर हर साल पूरी तिरुप्परकुंद्रम पहाड़ी पर दीप जलाने की अनुमति दी जाए और मुरुगन भक्तों को पूजा-अर्चना की स्वतंत्रता दी जाए।
मदुरै स्थित तिरुप्परकुंद्रम मंदिर भगवान मुरुगन के छह प्रमुख धामों में से एक माना जाता है। यह स्थान भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा संरक्षित स्मारक भी है। सुप्रीम कोर्ट में यह याचिका मद्रास हाईकोर्ट के एक हालिया निर्णय के बाद दाखिल की गई है, जिसमें एकल न्यायाधीश के आदेश को बरकरार रखते हुए दीपस्तंभ पर दीप प्रज्वलन की अनुमति दी गई थी।
मद्रास हाईकोर्ट की खंडपीठ — न्यायमूर्ति जी जयचंद्रन और न्यायमूर्ति के के रामकृष्णन — ने 6 जनवरी को फैसला सुनाते हुए तमिलनाडु सरकार के इस दावे को “बेतुका” बताया कि दीप जलाने से सार्वजनिक शांति भंग हो सकती है। अदालत ने स्पष्ट किया कि जहां दीपस्तंभ स्थित है, वह श्री सुब्रमणिय स्वामी मंदिर की संपत्ति है।
अदालत ने राज्य सरकार की आपत्तियों को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि धार्मिक आस्था और परंपरा के इस अनुष्ठान को रोकने का कोई औचित्य नहीं है।
सुप्रीम कोर्ट में हिंदू धर्म परिषद ने मांग की कि दीपस्तंभ पर हर समय एक दीप जलता रहे, और मंदिर की पहाड़ी की देखरेख पूरी तरह से एएसआई को सौंपी जाए ताकि सांस्कृतिक धरोहर का संरक्षण हो सके।
शीर्ष अदालत ने अब केंद्र, राज्य सरकार, एएसआई और अन्य पक्षों से जवाब तलब किया है। मामले की आगे की सुनवाई उत्तर प्राप्त होने के बाद की जाएगी।

