सुप्रीम कोर्ट काला जादू और अवैध धर्म परिवर्तन पर अगले सप्ताह में कर सकता है सुनवाई

नई दिल्ली—- सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दाखिल कर काला जादू और धर्म परिवर्तन पर रोक लगाने की मांग की गई है। इस याचिका में केंद्र सरकार और राज्य सरकारों को अवैध धर्मान्तरण और काला जादू जैसे अंधविश्वास के चलन पर रोक लगाने के निर्देश देने की मांग की गई है।

भाजपा नेता और वरिष्ठ अधिवक्ता अश्वनी कुमार की ओर से दाखिल याचिका में केंद्र सरकार के गृहमंत्रालय और मिनिस्ट्री के साथ साथ देश भर के कई राज्यों को प्रतिवादी बनाया गया है। 

सूत्रों के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट आने वाले सप्ताह में इस मामले पर सुनवाई कर सकती है। दाखिल याचिका में जिक्र है कि अवैध धर्म परिवर्तन और काला जादू जैसे चलन पर रोक लगाई जाए। इस तरह के धर्मांतरण का शिकार निचले तबके के लोग होते हैं। जिसमे ज्यादातर सामाजिक और आर्थिक रूप से पिछडे लोग खासतौर पर एसटी और एससी श्रेणी से जुड़े लोग। 

संविधान का हवाला दिया—- इस तरह की क्रियाएं संविधान के आर्टिकल 14,21,25 का उल्लंघन करता है। ये समानता के अधिकार,जीवन के अधिकार और धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार में दखलंदाजी है। हमारा संविधान सेक्युलर है और वह संविधान का अभिन्न अंग है। और उक्त धर्मपरिवर्तन और काला जादू आदि का चलन सेक्युलर सिध्दांत के भी खिलाफ है। याचिका में उल्लेख है कि संविधान का आर्टिकल 25 धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार प्रदान करता है। और कहा गया है कि समस्त नागरिकों को समान अधिकार है कि वह अपने धर्म को माने और धार्मिक प्रैक्टिस करें।

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इसमें शर्त लगाई गई है कि पब्लिक आर्डर नैतिकता और हेल्थ पर विपरीत असर नही होना चाहिए। साथ ही याचिका में जिक्र है कि सरकार इंटरनेशनल लॉ से भी बंधा हुआ है जिसके तहत राज्य सरकार की ड्यूटी है कि वह प्रत्येक नागरिक को प्रोटेक्ट करे और उसके धार्मिक स्वतंत्रता को कायम रखे। सुप्रीम कोर्ट से गुहार लगाई गई है कि सरला मुद्रल केस में दिए गए फैसले को लागू किया जाय और धर्म के नाम पर किसी एब्यूस होने से बचाने के लिए कमेटी का गठन किया जाय। 

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