‘कार्तिगई दीपम’ आदेश के विरोध में न्यायमूर्ति जी आर स्वामीनाथन पर की गई कथित जातीय-धार्मिक टिप्पणियों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु सरकार से मांगा जवाब

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को तमिलनाडु सरकार, डीजीपी, चेन्नई पुलिस आयुक्त और अन्य अधिकारियों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है कि क्या मद्रास हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति जी आर स्वामीनाथन के खिलाफ की गई कथित जाति और धर्म आधारित आपत्तिजनक टिप्पणियों के संबंध में कोई कार्रवाई की गई है।

न्यायमूर्ति अरविंद कुमार और न्यायमूर्ति पी बी वराले की पीठ ने राज्य सरकार को 2 फरवरी तक स्थिति रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है।

यह मामला अधिवक्ता जी एस मणि द्वारा दायर याचिका से जुड़ा है जिसमें आरोप लगाया गया है कि डीएमके समर्थित दलों, वामपंथी पार्टियों, कुछ व्यक्तियों और अधिवक्ताओं ने मद्रास हाईकोर्ट की चेन्नई और मदुरै पीठों के परिसर सहित सार्वजनिक स्थानों पर विरोध प्रदर्शन किए और न्यायमूर्ति स्वामीनाथन के खिलाफ अवमाननापूर्ण तथा जातीय-धार्मिक टिप्पणियां कीं।

याचिका में कहा गया कि ये टिप्पणियां सामाजिक सौहार्द को भंग करने और सांप्रदायिक तनाव पैदा करने की मंशा से की गईं। याचिकाकर्ता ने ऐसे लोगों के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही सहित सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की है।

प्रसंगवश, 1 दिसंबर 2025 को न्यायमूर्ति स्वामीनाथन ने ‘थिरुपरनकुंड्रम’ की पहाड़ी पर स्थित दीपथून (पत्थर का दीप स्तंभ) पर ‘कार्तिगई दीपम’ पर्व के अवसर पर दीप प्रज्वलन की अनुमति दी थी। उन्होंने स्पष्ट किया था कि दीप प्रज्ज्वलन से पास स्थित दरगाह की संरचना पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा क्योंकि दरगाह दीप स्तंभ से लगभग 50 मीटर दूर है।

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जब प्रशासन ने आदेश का पालन नहीं किया, तो 3 दिसंबर को न्यायाधीश ने एक और आदेश जारी कर श्रद्धालुओं को स्वयं दीप प्रज्ज्वलित करने की अनुमति दी और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए CISF की तैनाती के निर्देश दिए।

इसके बाद तमिलनाडु सरकार ने सुप्रीम कोर्ट का रुख कर हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती दी थी। वहीं अब न्यायमूर्ति के खिलाफ की गई टिप्पणियों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने अलग से जवाब मांगा है।

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