सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ताओ को हाई कोर्ट जज नियुक्त करने का राजस्थान में विरोध शुरू

सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन ने दावा किया है कि हाई कोर्ट के जजों के रिक्त पड़े पद को भरने के लिए ने सुप्रीम कोर्ट में वकालत कर रहे वकीलों को हाई कोर्ट का जज नियुक्त करने के प्रस्ताव को देश के सीजेआई एनवी रमना ने सहमती दे दी है। लेकिन अब इसको लेकर विरोध भी शुरू हो गया है।

राजस्थान में अधिवक्ताओ ने विरोध को लेकर मंथन शुरू कर दिया है। दूसरी ओर सीजेआई कार्यालय में सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन ने प्रस्ताव मिलने की बात को स्वीकार किया है,किन्तु प्रस्ताव पर CJI की सहमति की पुष्टि नही की है।

राजस्थान बार काउंसिल की तरफ से इस बाबत मंथन शुरू कर दिया है। इधर हाई कोर्ट जज के पद पर रिटायर्ड न्यायिक अधिकारियों की नियुक्ति के विरूद्ध सुप्रीम कोर्ट तक जा चुके हैं। एडवोकेट सुनील ने इस मुद्दे को लेकर कोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए देश के सीजेआई एनवी रमना को विरोध पत्र भी लिखा है। 

उल्लेखनीय है कि राजस्थान हाई कोर्ट में जज के 50 में से 27 पद रिक्त है।देश के अन्य हाई कोर्ट में भी जज के पद खाली है। इस बीच पहले देश के प्रधान न्यायाधीश एनवी रमना ने हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीशों को रिक्त पदों के लिए एसओपी के मुताबिक नाम भेजने के लिए पत्र लिखा है। 

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इधर राजस्थान बार काउंसिल के सदस्य और पूर्व अध्यक्ष संजय शर्मा का कहना है कि इन मामले को लेकर साधारण सभा की बैठक बुलाने की मांग की जाएगी। क्योंकि सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता राजस्थान हाई कोर्ट में पैरवी ही नही करते तो यहां हाई कोर्ट कॉलेजियम उनकी योग्यता का पता कैसे लगाएगी। सुप्रीम कोर्ट के वकीलों को हाई कोर्ट का न्यायाधीश बनाया गया तो हाई कोर्ट कॉलेजियम का महत्व ही नही रहेगा। 

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