सुप्रीम कोर्ट ने ‘टीम इंडिया’ नाम पर पाबंदी की मांग करने वाली याचिका को बताया ‘फिजूल’, याचिका खारिज

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को एक जनहित याचिका को सिरे से खारिज कर दिया जिसमें सार्वजनिक प्रसारक प्रसार भारती (जो दूरदर्शन और ऑल इंडिया रेडियो संचालित करता है) को भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) की टीम को “टीम इंडिया” कहने से रोकने की मांग की गई थी। अदालत ने याचिका को “फ्रिवोलस” यानी पूरी तरह फिजूल करार देते हुए कहा कि इससे न्यायालय का समय बर्बाद होता है।

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमल्या बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम. पंचोली की पीठ ने दिल्ली हाई कोर्ट के 8 अक्टूबर, 2023 के आदेश को बरकरार रखा, जिसमें यह याचिका खारिज कर दी गई थी।

“आप लोग घर बैठकर याचिकाएं लिखना शुरू कर देते हैं… अदालत का बोझ न बढ़ाएं,” मुख्य न्यायाधीश ने तल्ख टिप्पणी की।

यह याचिका अधिवक्ता रीपक कंसल द्वारा दायर की गई थी। उन्होंने तर्क दिया कि BCCI एक निजी संस्था है, जिसे न तो राष्ट्रीय खेल महासंघ (National Sports Federation) के रूप में मान्यता प्राप्त है और न ही यह सूचना का अधिकार अधिनियम की धारा 2(ह) के तहत ‘सार्वजनिक प्राधिकरण’ है। ऐसे में उसे “टीम इंडिया” या “भारतीय राष्ट्रीय क्रिकेट टीम” कहे जाना देश के प्रतीकों के अनुचित उपयोग को रोकने वाले कानूनों का उल्लंघन है।

याचिका में Emblems and Names (Prevention of Improper Use) Act, 1950 और Flag Code of India का भी हवाला दिया गया था।

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पीठ ने याचिकाकर्ता के तर्कों को सिरे से खारिज करते हुए पूछा:

“जो टीम भारत का प्रतिनिधित्व कर रही है, वह टीम इंडिया नहीं है? अगर दूरदर्शन या कोई और संस्था उसे टीम इंडिया कह रही है तो क्या वह टीम इंडिया नहीं है?”

पीठ ने यह भी कहा कि इस प्रकार की याचिकाएं केवल न्यायपालिका का समय बर्बाद करती हैं।

“यह कोर्ट और आपका, दोनों का समय बर्बाद करने वाली बात है… क्या यह टीम भारत का प्रतिनिधित्व नहीं कर रही?” पीठ ने तीखे अंदाज़ में कहा।

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BCCI अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (ICC) द्वारा मान्यता प्राप्त संस्था है जो भारत की पुरुष और महिला क्रिकेट टीमों का चयन करती है और उन्हें अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंटों में भेजती है। टीम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर “India” के नाम से खेलती है। भारत सरकार या किसी अन्य प्राधिकरण ने इस पर आपत्ति नहीं जताई है। दूरदर्शन, आकाशवाणी और अन्य मीडिया संस्थान वर्षों से BCCI की टीम को “टीम इंडिया” के रूप में ही प्रस्तुत करते रहे हैं।

सुप्रीम कोर्ट के इस निर्णय से स्पष्ट है कि बिना कानूनी आधार वाली, प्रतीकात्मक आपत्तियों पर आधारित याचिकाएं अदालत के समय का दुरुपयोग हैं और उन्हें प्रोत्साहित नहीं किया जा सकता।

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