सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को लखनऊ के वकील अशोक पांडे की उस याचिका को खारिज कर दिया जिसमें उन्होंने 2023 के एक आदेश में लगाए गए ₹5 लाख के जुर्माने को घटाकर ₹25,000 करने की मांग की थी। पांडे का कहना था कि कोर्ट में मौखिक रूप से ₹25,000 का जुर्माना बताया गया था, लेकिन लिखित आदेश में ₹5 लाख अंकित है।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ ने कहा, “हम आदेश के अनुसार चलेंगे और उसमें ₹5 लाख का उल्लेख है।”
अशोक पांडे ने 2023 में एक जनहित याचिका दायर कर न्यायमूर्ति देवेंद्र कुमार उपाध्याय की बंबई हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के रूप में शपथ को असंवैधानिक करार देने की मांग की थी। उनका आरोप था कि 29 जुलाई 2023 को जब उपाध्याय ने शपथ ली, तब उन्होंने संविधान की अनुसूची-3 में वर्णित प्रारूप का पालन नहीं किया और अपने नाम से पहले ‘मैं’ शब्द नहीं बोला।
याचिका में यह भी कहा गया था कि उस समारोह में गोवा, दमन और दीव के राज्यपाल और मुख्यमंत्री को आमंत्रित नहीं किया गया था, जो कि त्रुटिपूर्ण प्रक्रिया है। उन्होंने मांग की थी कि न्यायमूर्ति उपाध्याय को दोबारा शपथ दिलाई जाए।
13 अक्टूबर 2023 को तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश डी.वाई. चंद्रचूड़ (अब सेवानिवृत्त), न्यायमूर्ति जे.बी. पारदीवाला और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा की पीठ ने इस याचिका को खारिज कर दिया था और इसे “पूर्णतः निराधार” बताया था।
पीठ ने टिप्पणी की थी, “मूर्खता की भी एक सीमा होती है… यह केवल कोर्ट का समय बर्बाद करने और पब्लिसिटी पाने की कोशिश है। अब समय आ गया है कि इस तरह की याचिकाओं पर जुर्माना लगाया जाए।”
सोमवार को सुनवाई के दौरान पांडे ने दावा किया कि मौखिक आदेश ₹25,000 का था, लेकिन अब जिला कलेक्टर ₹5 लाख की वसूली की कार्रवाई कर रहे हैं। उन्होंने आदेश में सुधार और जांच की मांग की।
लेकिन पीठ ने साफ किया कि अदालत लिखित आदेश के अनुसार ही चलेगी और याचिका को खारिज कर दिया। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने टिप्पणी की, “ये सब पब्लिसिटी पिटीशन हैं।”

