सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस एस.वी.एन. भट्टी और जस्टिस एन.वी. अंजारिया की पीठ ने बॉम्बे हाईकोर्ट के उस आदेश को आंशिक रूप से रद्द कर दिया है जो अपील के तय दायरे से बाहर चला गया था। इसके साथ ही, शीर्ष अदालत ने 18 एकड़ कृषि भूमि के प्रबंधन के लिए एडवोकेट रिसीवर नियुक्त करने का निर्देश देते हुए गुजरात हाईकोर्ट के आदेशों में संशोधन किया है। दो अलग-अलग हाईकोर्ट में चल रही निष्पादन (एग्जीक्यूशन) कार्यवाहियों और काश्तकारी (टेनेंसी) दावों पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने बॉम्बे हाईकोर्ट के समक्ष लंबित एक अंतरिम रिकॉल आवेदन को उचित निर्णय के लिए बहाल कर दिया, जबकि गुजरात में मुकदमेबाजी के लंबित रहने के दौरान एडवोकेट रिसीवर के माध्यम से भूमि के प्रशासन का निर्देश दिया।
मामले की पृष्ठभूमि
यह विवाद अहमदाबाद जिले की साणंद तालुका के सनाथल गांव में स्थित ब्लॉक संख्या 850पी (पुराने सर्वे नंबर 743, 744 और 745), 853 (पुराना सर्वे नंबर 747) और 859पी (पुराना सर्वे नंबर 733) की लगभग 18 एकड़ 10 गुंठा कृषि भूमि से संबंधित है।
हीराबाई देसाई के कानूनी वारिसों ने 30 अक्टूबर 2013 और 15 अप्रैल 2015 को सहमति पत्र (MoU) और पूरक सहमति पत्र निष्पादित कर यह जमीन प्रतिवादी संख्या 2 और 3 को स्थानांतरित करने पर सहमति जताई थी। इसके बाद प्रतिवादी संख्या 2 और 3 ने सहमति पत्रों के विशिष्ट निष्पादन के लिए सूट संख्या 955/2015 दायर किया, जिसमें 6 मई 2016 को बॉम्बे हाईकोर्ट द्वारा एक सहमति डिक्री पारित की गई और कोर्ट रिसीवर नियुक्त किया गया।
वर्ष 2016 की डिक्री को लागू करने के लिए प्रतिवादी संख्या 2 और 3 ने निष्पादन आवेदन ई.ए. (एल) संख्या 5258/2021 दायर किया। 11 मार्च 2022 को हाईकोर्ट ने आई.ए. (एल) संख्या 20980/2021 को स्वीकार करते हुए संपत्ति का खाली कब्जा सौंपने का निर्देश दिया। इसके बाद याचिकाकर्ताओं ने 11 मार्च के कब्जा हस्तांतरण आदेश को वापस लेने (रिकॉल) की मांग करते हुए आई.ए. (एल) संख्या 10443/2022 दायर की।
जब एकल पीठ (सिंगल जज) ने 4 अप्रैल 2022 को अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया, तो याचिकाकर्ताओं ने बॉम्बे हाईकोर्ट की खंडपीठ (डिवीजन बेंच) के समक्ष अपील (एल) संख्या 12396/2022 दायर की। हालांकि, खंडपीठ ने न केवल अपील खारिज कर दी, बल्कि एकल पीठ के समक्ष लंबित मुख्य रिकॉल आवेदन को भी वापस मंगाकर उसका निपटारा कर दिया। खंडपीठ ने टिप्पणी की थी कि “याचिकाकर्ताओं का आवेदन इस गलत और भ्रामक धारणा पर आधारित था कि 11.03.2022 के आदेश ने निष्पादन में जमीनों के लिए एक कोर्ट रिसीवर नियुक्त किया था।”
दूसरी ओर गुजरात में, याचिकाकर्ताओं ने दावा किया कि 3 जून 2024 को गुजरात काश्तकारी एवं कृषि भूमि अधिनियम, 1948 की धारा 32जी के तहत उन्हें “संरक्षित काश्तकार” घोषित किया गया था। प्रतिवादी संख्या 2 और 3 ने इस आदेश को गुजरात हाईकोर्ट में विशेष सिविल आवेदन संख्या 9081 और 10167/2024 के माध्यम से चुनौती दी। 16 अक्टूबर 2024 को सिंगल जज ने अंतरिम व्यवस्था देते हुए याचिकाकर्ताओं को खड़ी फसल काटने की अनुमति दी, जिसे 24 दिसंबर 2024 को लेटर पेटेंट अपील में खंडपीठ ने बरकरार रखा।
पक्षों की दलीलें
वरिष्ठ अधिवक्ता पी.बी. सुरेश और वी. गिरि ने अपनी-अपनी दलीलें पेश कीं।
याचिकाकर्ताओं के वरिष्ठ वकील ने तर्क दिया कि बॉम्बे हाईकोर्ट की खंडपीठ ने मुख्य रिकॉल आवेदन आई.ए. (एल) संख्या 10443/2022 का निपटारा करके गलती की, जबकि उसके समक्ष केवल अंतरिम आदेश को चुनौती दी गई थी। गुजरात की कार्यवाही के संबंध में उन्होंने कहा कि चूंकि 3 जून 2024 के काश्तकारी आदेश के तहत उनका कब्जा सुरक्षित था, इसलिए केवल यथास्थिति बनाए रखते हुए उन्हें फसल काटने की अनुमति देना कानूनी रूप से गलत था।
इसके विपरीत, प्रतिवादियों ने तर्क दिया कि याचिकाकर्ताओं द्वारा दायर सिविल सूट संख्या 724/2025 को देखते हुए 12 अप्रैल 2022 के आदेश के खिलाफ आपत्तियां अब केवल अकादमिक रह गई हैं। उन्होंने कहा कि याचिकाकर्ताओं द्वारा दावा किया गया कब्जा निष्पादन आवेदन में कोर्ट रिसीवर द्वारा शुरू की गई सुपुर्दगी कार्यवाही के विपरीत है और याचिकाकर्ताओं को इस संपत्ति का आनंद लेने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।
अदालत का विश्लेषण
बॉम्बे हाईकोर्ट की कार्यवाहियों और रिकॉर्ड का अवलोकन करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने नोट किया कि खंडपीठ अपने समक्ष आई अपील की प्रक्रियात्मक सीमाओं से आगे निकल गई थी। शीर्ष अदालत ने टिप्पणी की कि 28 जून 2022 का विवादित आदेश “अपील (एल) संख्या 12396/2022 के विषय-वस्तु के दायरे से बाहर चला गया है।”
गुजरात हाईकोर्ट के आदेशों के संदर्भ में शीर्ष अदालत ने टिप्पणी की: “कब्जे के लिए छीना-झपटी जारी है, और दोनों पक्षों द्वारा परस्पर विरोधी तर्क दिए गए थे।” वरिष्ठ वकीलों के साथ चर्चा किए गए विकल्पों पर विचार करने के बाद, सुप्रीम कोर्ट ने माना कि जब तक मुख्य काश्तकारी आवेदन लंबित हैं, तब तक जमीन की देखरेख और प्रशासन के लिए एडवोकेट रिसीवर नियुक्त करना सबसे उपयुक्त उपाय होगा।
अदालत का निर्णय
सुप्रीम कोर्ट ने दोनों क्षेत्राधिकारों के लिए विशिष्ट निर्देश जारी करते हुए अपीलों का निपटारा किया:
- बॉम्बे हाईकोर्ट की कार्यवाही: अदालत ने बॉम्बे हाईकोर्ट के 28 जून 2022 के आदेश के पैराग्राफ 8 से 11 के निष्कर्षों को रद्द कर दिया और आई.ए. संख्या (एल) 10443/2022 को कानून के अनुसार सुनवाई और निपटारे के लिए बहाल कर दिया।
- गुजरात हाईकोर्ट की कार्यवाही: अदालत ने 16 अक्टूबर 2024 और 24 दिसंबर 2024 के आदेशों में संशोधन किया और गुजरात हाईकोर्ट के विद्वान सिंगल जज से विशेष सिविल आवेदन संख्या 9081 और 10167/2024 के लंबित रहने के दौरान संपत्ति के प्रशासन और पर्यवेक्षण के लिए एक एडवोकेट रिसीवर नियुक्त करने और उनका शुल्क तय करने का अनुरोध किया। यह नियुक्ति उन आवेदनों के अंतिम परिणाम के अधीन होगी।
मामले का विवरण
मामले का शीर्षक: परबतसिंह दौलतसंग डोडिया और अन्य बनाम रमेशभाई हरजीभाई मकवाना और अन्य
वाद संख्या: सिविल अपील संख्या 10586-10588/2026 साथ में सिविल अपील संख्या 10667-10668/2026
पीठ: जस्टिस एस.वी.एन. भट्टी और जस्टिस एन.वी. अंजारिया
निर्णय की तिथि: 20 अगस्त 2026

