संपत्ति का भौतिक विभाजन संभव नहीं: दिल्ली हाईकोर्ट ने रोहिणी स्थित 3-BHK फ्लैट के बंटवारे के लिए बिक्री का आदेश दिया

दिल्ली हाईकोर्ट ने रोहिणी स्थित एक 3-BHK फ्लैट से जुड़े विभाजन वाद (Partition Suit) में अंतिम डिक्री पारित करते हुए कहा है कि संपत्ति को इसके चार हिस्सेदारों के बीच भौतिक रूप से (Metes and Bounds) नहीं बांटा जा सकता। जस्टिस मिनी पुष्कर्णा की बेंच ने निर्देश दिया कि इस संपत्ति की बिक्री ‘इंटर-से बिडिंग’ (आपसी बोली) या सार्वजनिक नीलामी के माध्यम से की जाए। कोर्ट ने इस प्रक्रिया की देखरेख के लिए एक लोकल कमिश्नर (LC) भी नियुक्त किया है।

मामले की पृष्ठभूमि

यह मामला रोहिणी, सेक्टर-9, केदार अपार्टमेंट्स के फ्लैट नंबर B-704 (सातवीं मंजिल) के मालिकाना हक और बंटवारे से संबंधित है। इस मामले में 19 दिसंबर, 2025 को पहले ही एक प्रारंभिक डिक्री (Preliminary Decree) पारित की जा चुकी थी, जिसमें वादी पदम सागर बावेजा और तीन प्रतिवादियों को संपत्ति में $1/4$ हिस्से का हकदार घोषित किया गया था।

प्रारंभिक डिक्री के बाद, पक्षकारों को मध्यस्थता (Mediation) के लिए भेजा गया था। हालांकि, 23 मार्च, 2026 की मध्यस्थता रिपोर्ट के अनुसार, आपसी सहमति से समाधान निकालने का प्रयास विफल रहा।

पक्षकारों की दलीलें

सुनवाई के दौरान वादी और प्रतिवादियों के वकील इस बात पर सहमत (Ad-idem) थे कि चूंकि संपत्ति केवल एक 3-BHK फ्लैट है और हिस्सेदार चार हैं, इसलिए इसका भौतिक विभाजन व्यावहारिक नहीं है। पक्षकारों ने संयुक्त रूप से अनुरोध किया कि संपत्ति को आपसी बोली या निजी बिक्री के माध्यम से बेचा जाए और यदि यह विफल रहता है, तो सार्वजनिक नीलामी का रास्ता अपनाया जाए।

वादी के वकील ने कोर्ट को सूचित किया कि संपत्ति के मूल दस्तावेज (Original Title Deed) खो गए हैं और इस संबंध में एक प्राथमिकी (FIR) भी दर्ज कराई गई है। हालांकि, कोर्ट को बताया गया कि संपत्ति फ्रीहोल्ड है।

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इसके अतिरिक्त, यह तथ्य भी सामने आया कि प्रतिवादी संख्या 1 ने रोहिणी जिला न्यायालय में एक निषेधाज्ञा वाद (Injunction Suit) दायर किया था, जिसमें नवंबर 2025 में कोर्ट ने संपत्ति में तीसरे पक्ष का अधिकार बनाने पर रोक लगा दी थी।

हाईकोर्ट का विश्लेषण और निर्देश

जस्टिस मिनी पुष्कर्णा ने कहा कि चूंकि सभी पक्षकार संपत्ति बेचने पर सहमत हैं, इसलिए जिला न्यायालय का आदेश इस प्रक्रिया में बाधा नहीं बनेगा। कोर्ट ने स्पष्ट किया:

“चूंकि पक्षकार इस बात पर सहमत हैं कि वाद संपत्ति को बेचा जाना है, यह स्पष्ट किया जाता है कि जिला न्यायाधीश-III, उत्तर-पश्चिम जिला, रोहिणी कोर्ट, दिल्ली द्वारा वाद संख्या 17 CS DJ 920/2025 में पारित आदेश दिनांक 26 नवंबर, 2025, वर्तमान संपत्ति की बिक्री के रास्ते में नहीं आएगा।”

कोर्ट ने प्रतिवादी संख्या 1 को दो सप्ताह के भीतर जिला न्यायालय से वह वाद वापस लेने का निर्देश दिया। दस्तावेजों के संबंध में, कोर्ट ने सभी पक्षकारों को प्रमाणित प्रतियां प्राप्त करने में एक-दूसरे का सहयोग करने को कहा।

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कोर्ट का निर्णय

मामले के निस्तारण के लिए हाईकोर्ट ने निम्नलिखित निर्देश जारी किए:

  1. अंतिम डिक्री: कोर्ट ने वादी और तीनों प्रतिवादियों को रोहिणी फ्लैट में $1/4$ हिस्से का समान मालिक घोषित करते हुए अंतिम डिक्री पारित की।
  2. लोकल कमिश्नर की नियुक्ति: वकील सुश्री प्रेमा प्रियदर्शिनी को लोकल कमिश्नर नियुक्त किया गया।
  3. बिक्री की प्रक्रिया: लोकल कमिश्नर पहले पक्षकारों के बीच ‘इंटर-से बिडिंग’ कराएंगे। यदि छह सप्ताह के भीतर आपसी सहमति से बिक्री नहीं होती है, तो सिविल प्रक्रिया संहिता (CPC) के आदेश XXI नियम 66 के तहत सार्वजनिक नीलामी की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
  4. मूल्यांकन: लोकल कमिश्नर को सरकारी मान्यता प्राप्त मूल्यांकनकर्ता (Valuer) से संपत्ति की कीमत निर्धारित कराने की छूट दी गई है।
  5. शुल्क: लोकल कमिश्नर का शुल्क 3 लाख रुपये निर्धारित किया गया है, जिसे सभी पक्षकार समान रूप से वहन करेंगे।
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कोर्ट ने इस वाद को निपटाते हुए रजिस्ट्री को डिक्री शीट तैयार करने का आदेश दिया। मामले की अगली सुनवाई अनुपालन रिपोर्ट के लिए 21 जुलाई, 2026 को निर्धारित की गई है।

मामले का विवरण:

  • केस टाइटल: पदम सागर बावेजा बनाम नीति सिंह एवं अन्य
  • केस नंबर: CS(OS) 934/2025
  • पीठ: जस्टिस मिनी पुष्कर्णा
  • दिनांक: 16 अप्रैल, 2026

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