असम के सीएम की पत्नी पर टिप्पणी का मामला: पवन खेड़ा को गुवाहाटी हाईकोर्ट से झटका, अग्रिम जमानत याचिका खारिज

गुवाहाटी हाईकोर्ट ने शुक्रवार को कांग्रेस नेता पवन खेड़ा की अग्रिम जमानत याचिका को खारिज कर दिया है। यह मामला असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी, रिनिकी भुइयां शर्मा के खिलाफ लगाए गए आरोपों से संबंधित है। खेड़ा ने आरोप लगाया था कि मुख्यमंत्री की पत्नी के पास एक से अधिक पासपोर्ट और विदेशों में अघोषित संपत्तियां हैं।

हाईकोर्ट की एकल पीठ के न्यायाधीश न्यायमूर्ति पार्थिव ज्योति सैकिया ने सोमवार को दायर की गई इस याचिका पर सुनवाई के बाद यह फैसला सुनाया। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने खेड़ा को राहत के लिए गुवाहाटी हाईकोर्ट जाने का निर्देश दिया था।

यह कानूनी विवाद पवन खेड़ा द्वारा सार्वजनिक रूप से किए गए उन दावों के बाद शुरू हुआ, जिसमें उन्होंने रिनिकी भुइयां शर्मा पर गंभीर आरोप लगाए थे। इन आरोपों के जवाब में, रिनिकी भुइयां शर्मा ने गुवाहाटी क्राइम ब्रांच पुलिस स्टेशन में खेड़ा और अन्य के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज कराया था। यह प्राथमिकी भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत दर्ज की गई है।

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पवन खेड़ा के लिए इस मामले में कानूनी राहत पाने का सफर काफी उतार-चढ़ाव भरा रहा है:

  • तेलंगाना हाईकोर्ट: सबसे पहले खेड़ा ने तेलंगाना हाईकोर्ट का रुख किया था, जहां से उन्हें सात दिनों की ट्रांजिट अग्रिम जमानत मिल गई थी।
  • सुप्रीम कोर्ट का हस्तक्षेप: असम पुलिस ने इस ट्रांजिट जमानत को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। शीर्ष अदालत ने अंतरिम सुरक्षा पर रोक लगाते हुए खेड़ा को संबंधित क्षेत्राधिकार वाले हाईकोर्ट (गुवाहाटी) में अपील करने को कहा।
  • गुवाहाटी हाईकोर्ट में सुनवाई: सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद खेड़ा ने सोमवार को गुवाहाटी हाईकोर्ट में याचिका दायर की। अदालत ने मंगलवार को दलीलें सुनने के बाद अपना आदेश सुरक्षित रख लिया था, जिसे शुक्रवार को सार्वजनिक किया गया।
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न्यायमूर्ति सैकिया ने भारतीय न्याय संहिता के तहत लगाए गए आरोपों की प्रकृति और मामले के तथ्यों पर विचार करते हुए अग्रिम जमानत देने से इनकार कर दिया। इस फैसले के बाद गुवाहाटी क्राइम ब्रांच द्वारा दर्ज मामले में खेड़ा की गिरफ्तारी पर लगी अंतरिम रोक हट गई है। अब उनके पास ऊपरी अदालत में अपील करने का विकल्प शेष है।

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