इलाहाबाद हाई कोर्ट ने पंचायत चुनाव की आरक्षण प्रक्रिया पर रोक लगाई।

राजधानी—- इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने राज्य के त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में सीटों के आरक्षण और आवंटन पर 15 मार्च तक स्टे लगा दिया है।

पीठ ने प्रदेश सरकार सहित सभी पक्षकारों को निर्देश दिया है कि पंचायत चुनाव से जुड़ी वर्ष 1994 के रूल्स 4 के तहत सीटों के आरक्षण को अगली सुनवाई तक अंतिम रूप न दिया जाए। साथ ही कोर्ट ने आधार वर्ष का मुद्दा उठाने वाली जनहित याचिका पर राज्य सरकार से जवाब दाखिल करने को कहा है। कोर्ट ने इसके लिए एक दिन का वक्त देकर सोमवार को अगली सुनवाई नियत की है। 

जस्टिस ऋतुराज अवस्थी और जस्टिस मनीष माथुर की खंडपीठ ने अजय कुमार द्वारा दाखिल याचिका में उपरोक्त आदेश दिया। याची ने पंचायत चुनाव में आरक्षण देने संबंधी 11 फरवरी के शासनादेश को चुनौती दी है। 

1994 के नियमों के आधार पर आरक्षण दिया जाना है, जिसका नियम 4 रोटेशनल आधार पर आरक्षण देने का प्रावधान करता है। और इसके तहत सीटों का आरक्षण 1995 को आधार वर्ष मानकर किया गया है। पर 16 सितंबर 2015 को नया शासनादेश जारी किया गया था। 

इसमें जिलों ,क्षेत्र व ग्राम पंचायतो की भौगोलिक सीमाओं में बदलाव की बात कहते हुए 2015 को आधार वर्ष मानने की आवश्यकता बताई गई। ऐसे में सीट आरक्षण के लिए 1995 को आधार वर्ष मानने का कोई कारण नही है।

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याचिकाकर्ता के पक्षकार अधिवक्ता का कहना है कि वर्तमान चुनाव में 1995 को आधार वर्ष मानकर सीटें आरक्षित की जा रही है। जो कानून की मंशा के विरुद्ध है। कोर्ट ने याची की इस दलील पर सभी पक्षकारों को जवाब पेश करने का निर्देश दिया है। 

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