हाइकोर्ट ने कहा संविधान के तहत संतान रखना या गर्भपात कराना पीड़िता का मौलिक अधिकार

ओडिशा हाईकोर्ट के जस्टिस एसके मिश्र और जस्टिस सावित्री की खंडपीठ ने कहा युवती के गर्भवती होने के 20 हफ़्तों बाद गर्भपात कराने का कोई नियम नही है। चूंकि पीड़िता नाबालिग है उसका भविष्य, सामाजिक सुरक्षा के मद्देनजर संविधान के आर्टिकल 21 के तहत संतान रखना या गर्भपात कराना पीड़िता का मौलिक अधिकार है।

एक नाबालिक युवती के गर्भवती होने की बात डायरेक्टर ऑफ मेडिकल एजुकेशन एंड ट्रेनिंग रिपोर्ट से 21 सप्ताह बाद पता चली थी। हालांकि मेडिकल टर्मिनेशन प्रेग्नेंसी अधिनियम के अनुसार 20 से 24 सप्ताह के मध्य गर्भधारण का गर्भपात करने का नियम नही है। 

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मेडिकल टर्मिनेशन प्रेगनेंसी संसोधन बिल 2020 मौजूदा समय राज्यसभा में विचाराधीन है। जिसमे अधिक से अधिक 24 हफ़्तों तक गर्भपात कराने का प्रावधान है। हालांकि अभी यह कानून में तब्दील नही हुआ है। ऐसे में गर्भधारण करने वाली पीड़िता नाबालिग है। उसके भविष्य और शारीरिक गठन को ध्यान में रखते हुए गर्भपात जरूरी होने की बात खंडपीठ ने महसूस करते है यह राय दी। कोर्ट की सुनवाई के दौरान पीड़िता के वकील गर्भपात को लेकर पहले की कई राय को उदाहरण के तौर पर रखा।

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