सरकार द्वारा गाइडलाइंस जारी,ओला उबर नही ले पाएंगे ज्यादा किराया

देश की जानी मानी ओला और ऊबर कैब एग्रीगेटर कंपनिया पीक आवर्स के दौरान किराए में कई गुना इजाफा कर देती है। लेकिन अब सरकार ने इन कंपनियों पर लगाम लगाने के लिए कमर कस ली है। 

सरकार ने बीते शुक्रवार को ओला और ऊबर के ऊपर डिमांड बढ़ने पर किराया बढ़ाने की एक सीमा तय कर दी है। अब यह कंपनियां मूल किराये का डेढ़ गुना से अधिक किराया नही ले सकेंगी।

 गौरतलब है कि सरकार का यह पहल कई मायनों में इसलिए भी अहम है क्योंकि कैब सेवा उपलब्ध कराने वाली कंपनियों के अधिकतम किराए पर रोक लगाने की लंबे वक्त से मांग हो रही थी। 

यह पहली बार है कि जब भारत मे ओला और ऊबर जैसी कंपनियों को रेग्युलेट करने के लिए सरकार द्वारा दिशा निर्देश जारी किए गए हैं।

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कैब एग्रीगेटर्स को देता स्थानीयकरण सुनिश्चित करना होगा।कि डेटा भारत के सर्वर पर कमसे कम 3 माह और अधिकतम 4 माह तक उस तारीख तक स्टोर किया जाय। जिस दिन डेटा जनरेट किया गया था।

डेटा को भारत सरकार के कानून के मुताबिक सुलभ बनाना होगा।लेकिन इस डेटा को ग्राहकों की सहमति के बिना साझा नही किया जाएगा। कैब एग्रीगेटर्स को 24 घंटे सात दिनों कंट्रोल रूम स्थापित करना होगा। और सभी ड्राइवर्स को हर समय कंट्रोल रूम से अनिवार्य रूप से जुड़ा होना चाहिये।

सरकार द्वारा जारी गाइडलाइंस के मुताबिक कैब एग्रीगेटर को बेस फेयर से 50 प्रतिशत से कम चार्ज करने की अनुमति होगी। 

वहीं कैंसिलेशन फीस कुल किराए का दस प्रतिशत होगा। जो राइडर और ड्राइवर के लिए 100 रुपए से अधिक नही होगा। ड्राइवर को वाहन चलाने का शुल्क 80 प्रतिशत प्राप्त होगा जबकि कैब कंपनियों को 20 प्रतिशत किराया मिलेगा ।

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