राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने दिल्ली की एक विशेष अदालत से कश्मीरी अलगाववादी नेता और ‘दुख्तरान-ए-मिल्लत’ (DEM) की प्रमुख आसिया अंद्राबी को उम्रकैद की सजा देने की मांग की है। एजेंसी का कहना है कि अंद्राबी और उनकी सहयोगियों ने भारत के खिलाफ साजिश रचकर राज्य के खिलाफ युद्ध छेड़ने की कोशिश की, इसलिए कड़ी सजा देकर स्पष्ट संदेश दिया जाना जरूरी है।
दिल्ली की विशेष अदालत में अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश चंदर जीत सिंह के समक्ष आसिया अंद्राबी और उनकी दो सहयोगियों — सोफी फहमीदा और नाहिदा नसीरीन — की सजा तय करने पर बहस हुई। इन तीनों को 14 जनवरी 2026 को गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) और भारतीय दंड संहिता (IPC) के विभिन्न प्रावधानों के तहत दोषी ठहराया गया था।
सजा के प्रश्न पर सुनवाई के दौरान NIA ने अदालत में दलील दी कि दोषी महिलाएं शिक्षित होने के बावजूद एक सुनियोजित साजिश का हिस्सा थीं, जिसका उद्देश्य भारत सरकार के खिलाफ युद्ध छेड़ना था। एजेंसी के अनुसार वे केवल साजिश में शामिल नहीं थीं बल्कि इस पूरी गतिविधि की मुख्य भूमिका में थीं।
अभियोजन पक्ष ने अदालत को बताया कि आरोपियों ने सोशल मीडिया और विभिन्न सभाओं के माध्यम से ऐसे संदेश फैलाए जिनका उद्देश्य भारत के खिलाफ माहौल बनाना था। विशेष लोक अभियोजक ने कहा कि ट्विटर और फेसबुक पर की गई पोस्ट और बयान दर्शाते हैं कि वे कानून द्वारा स्थापित सरकार के खिलाफ एक संगठित अभियान चला रही थीं।
NIA के अनुसार, इन तीनों ने प्रतिबंधित संगठन दुख्तरान-ए-मिल्लत का इस्तेमाल करते हुए जम्मू-कश्मीर को भारत से अलग करने के लिए लोगों को उकसाने और विद्रोह भड़काने की कोशिश की।
एजेंसी ने अदालत को यह भी बताया कि आसिया अंद्राबी के खिलाफ जम्मू-कश्मीर के अलग-अलग थानों में कुल 33 एफआईआर दर्ज हैं। वहीं उनकी सहयोगी सोफी फहमीदा नौ और नाहिदा नसीरीन पांच आपराधिक मामलों में कथित रूप से शामिल रही हैं।
NIA ने यह भी आरोप लगाया कि आरोपियों के संबंध पाकिस्तान स्थित संगठनों और संयुक्त राष्ट्र द्वारा घोषित आतंकवादी हाफिज सईद से जुड़े तत्वों से थे। एजेंसी के अनुसार इस तरह का संपर्क मामले को केवल घरेलू साजिश तक सीमित नहीं रखता बल्कि इसे देश की सुरक्षा और संप्रभुता के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय स्तर की साजिश बना देता है।
अभियोजन पक्ष ने यह भी कहा कि आरोपियों के भाषण और सोशल मीडिया संदेशों ने युवाओं को कट्टरपंथ की ओर प्रेरित किया और उन्हें उग्रवाद की राह पर जाने के लिए प्रभावित किया। इस संदर्भ में पुलवामा, उरी और लाल किले जैसे बड़े आतंकी हमलों का उल्लेख करते हुए अभियोजन ने कहा कि ऐसी गतिविधियों से निर्दोष लोगों की जान और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान होता है।
NIA ने एक घटना का भी हवाला दिया जिसमें कथित तौर पर अंद्राबी ने विरोध प्रदर्शन के दौरान गाय की बलि दी थी। एजेंसी का कहना है कि यह कदम कानून की अवहेलना करने और समुदायों के बीच वैमनस्य बढ़ाने की मंशा से उठाया गया था, जो राष्ट्रीय एकता के लिए हानिकारक है।
इन दलीलों के आधार पर NIA ने अदालत से मांग की कि अंद्राबी और उनकी सहयोगियों को IPC की धारा 121A और UAPA के संबंधित प्रावधानों के तहत उम्रकैद की सजा दी जाए। एजेंसी ने यह भी कहा कि अलग-अलग अपराधों के लिए दी जाने वाली सजाएं एक के बाद एक चलनी चाहिए।
वहीं बचाव पक्ष ने उम्रकैद की मांग का विरोध करते हुए कहा कि अभियोजन यह साबित करने में विफल रहा है कि आरोपियों के भाषण या सोशल मीडिया पोस्ट के कारण किसी व्यक्ति ने हिंसा का रास्ता अपनाया।
सुनवाई के दौरान अदालत ने तीनों दोषियों को भी अपनी बात रखने का अवसर दिया। वे इस सुनवाई में वर्चुअल माध्यम से पेश हुईं।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने फैसला सुरक्षित रखते हुए सजा पर आदेश सुनाने के लिए 24 मार्च की तारीख तय की है।
अदालत ने तीनों को UAPA की धारा 20, 38 और 39 के तहत दोषी पाया है, जो किसी आतंकवादी संगठन की सदस्यता और समर्थन से संबंधित हैं। इसके अलावा उन्हें IPC की धारा 153A, 153B, 120B, 505 और 121A के तहत भी दोषी ठहराया गया है।

