NGT अध्यक्ष न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव और विशेषज्ञ सदस्य ए. सेंथिल वेल की पीठ ने इस याचिका पर सुनवाई की जिसमें आगरा के हरित क्षेत्र में हो रहे कथित विनाश और अवैध निर्माण पर चिंता जताई गई है।
याचिका में कहा गया है कि ताजमहल और आगरा किले के बीच स्थित 100 वर्ष से अधिक पुराने शाहजहाँ पार्क में आगरा विकास प्राधिकरण द्वारा कियोस्क, सीमेंट-पक्के रास्ते और अन्य निर्माण किए जा रहे हैं। इन कार्यों के दौरान पुराने पेड़ों की जड़ों के पास गड्ढे खोदे गए हैं, जिससे हरित आवरण को नुकसान पहुँचा है और पक्षियों व तितलियों के प्राकृतिक आवास प्रभावित हुए हैं।
पीठ ने यह भी नोट किया कि आगरा नगर निगम द्वारा ग्वालियर रोड के आगे मधुनगर क्षेत्र में हरित पट्टी पर एक ‘सेल्फी पॉइंट’ के लिए अवैध रूप से कंक्रीट का ढांचा खड़ा किया जा रहा है।
इसके अलावा, याचिका में आरोप लगाया गया है कि कई निजी व्यक्तियों ने भी हाईवे के दोनों ओर की अनिवार्य हरित पट्टी में पेड़ काटकर अवैध निर्माण कर लिया है।
पीठ ने कहा, “मूल याचिका पर्यावरणीय मानदंडों के अनुपालन से संबंधित गंभीर मुद्दे उठाती है,” और इसके आधार पर सभी संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किया गया है।
जिन पक्षों को नोटिस भेजा गया है, वे हैं:
- केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय
- उत्तर प्रदेश सरकार
- उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड
- आगरा के जिलाधिकारी
- आगरा के पुलिस आयुक्त
- जिला वन अधिकारी
- ताज ट्रेपेजियम जोन अथॉरिटी
- आगरा विकास प्राधिकरण
अगली सुनवाई की तारीख 12 मार्च तय की गई है।
आगरा ताज ट्रेपेजियम जोन (TTZ) में आता है, जिसे ताजमहल को प्रदूषण से बचाने के लिए विशेष पर्यावरणीय क्षेत्र घोषित किया गया है। इस क्षेत्र में विकास कार्यों और औद्योगिक गतिविधियों पर सख्त पर्यावरणीय नियम लागू हैं। हाल के वर्षों में TTZ के भीतर बढ़ते निर्माण कार्य और पेड़ों की कटाई को लेकर पर्यावरण कार्यकर्ता और न्यायपालिका दोनों चिंतित हैं।

