दिल्ली हाईकोर्ट ने नेशनल हेराल्ड से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में कांग्रेस नेता सोनिया गांधी, राहुल गांधी और अन्य उत्तरदाताओं को प्रवर्तन निदेशालय (ED) की याचिका पर अपना जवाब दर्ज करने के लिए तीन सप्ताह की मोहलत दी है। ED ने निचली अदालत के उस आदेश को चुनौती दी है, जिसमें एजेंसी की ओर से दाखिल चार्जशीट पर संज्ञान लेने से इनकार कर दिया गया था।
जस्टिस मनोज जैन की पीठ ने मामले की अगली सुनवाई 10 सितंबर तय की है। कोर्ट में भारी व्यस्तता और पहले से तय दो समय-बद्ध मामलों के कारण इस याचिका पर विस्तृत सुनवाई नहीं हो सकी।
निचली अदालत के आदेश पर ED का ऐतराज
सुनवाई के दौरान उत्तरदाताओं के वरिष्ठ वकीलों ने ED की अर्जी पर जवाब दाखिल करने के लिए और समय देने का अनुरोध किया। इस पर ED की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि कोर्ट द्वारा दो महीने पहले समय दिए जाने के बावजूद जवाब दाखिल नहीं किया गया है। उन्होंने कहा कि यह मामला पूरी तरह कानून के सवाल पर आधारित है और निचली अदालत का फैसला गलत था।
यह पूरा विवाद निचली अदालत के 16 दिसंबर के फैसले से जुड़ा है। निचली अदालत ने ED की अभियोजन शिकायत (चार्जशीट) पर संज्ञान लेने से यह कहते हुए मना कर दिया था कि बिना किसी अनुसूचित अपराध की एफआईआर के मनी लॉन्ड्रिंग की जांच कानूनी रूप से मान्य नहीं है।
निचली अदालत ने ध्यान दिलाया था कि केंद्रीय एजेंसी की जांच किसी पुलिस एफआईआर पर नहीं, बल्कि बीजेपी नेता सुब्रमण्यम स्वामी की एक निजी शिकायत पर आधारित थी। स्वामी की 2014 की शिकायत और न्यायिक समन के बाद भी केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने इस मामले में कोई एफआईआर दर्ज नहीं की थी।
हाईकोर्ट की नोटिस और पूर्व आदेश
इससे पहले हाईकोर्ट ने 22 दिसंबर 2025 को ED की मुख्य याचिका और निचली अदालत के आदेश पर रोक लगाने की मांग वाली अर्जी पर सोनिया गांधी और राहुल गांधी समेत अन्य को नोटिस जारी किया था। जिन अन्य पक्षों को नोटिस दिया गया था, उनमें सुमन दुबे, सैम पित्रोदा, सुनील भंडारी, यंग इंडियन और डोटेक्स मर्चेंडाइज प्राइवेट लिमिटेड शामिल हैं।
19 फरवरी को हुई सुनवाई में सॉलिसिटर जनरल ने तर्क दिया था कि यह मामला कानून के स्पष्ट सवाल से जुड़ा है और निचली अदालत का फैसला अन्य मामलों के रास्ते में रुकावट बन रहा है।
आरोप और वित्तीय गड़बड़ी के दावे
ED ने सोनिया गांधी, राहुल गांधी, दिवंगत कांग्रेस नेता मोतीलाल वोरा व ऑस्कर फर्नांडीस, सुमन दुबे, सैम पित्रोदा और कंपनी ‘यंग इंडियन’ पर आपराधिक साजिश रचने और मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप लगाया है।
एजेंसी का दावा है कि आरोपियों ने नेशनल हेराल्ड अखबार की प्रकाशक कंपनी ‘एसोसिएटेड जर्नल लिमिटेड’ (AJL) की लगभग 2,000 करोड़ रुपये की संपत्ति को अवैध तरीके से अधिग्रहित किया। ED के अनुसार, सोनिया गांधी और राहुल गांधी के पास यंग इंडियन में 76 प्रतिशत हिस्सेदारी थी, जिसने 90 करोड़ रुपये का कर्ज चुकाने के बदले AJL की संपत्तियों को अपने कब्जे में लिया।
ED ने हाईकोर्ट में दायर अपनी याचिका में कहा है कि निचली अदालत का रुख मजिस्ट्रेट के समक्ष निजी शिकायत के जरिए सामने आने वाले मनी लॉन्ड्रिंग मामलों में आरोपियों को अनुचित छूट दे देता है। एजेंसी का कहना है कि किसी अदालत द्वारा निजी शिकायत पर लिया गया संज्ञान, पुलिस की एफआईआर से भी अधिक मजबूत कानूनी आधार रखता है।

