मोहाली के एक ग्लास मर्चेंट को ग्राहक से पूरा भुगतान और लेबर चार्ज लेने के बाद भी घर में टफन ग्लास न लगाने पर भारी नुकसान उठाना पड़ा है। रोपड़ जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने सेवा में गंभीर लापरवाही का दोषी पाते हुए ‘प्रीत ग्लास हाउस’ को ग्राहक के 91 हजार रुपये 9 फीसदी वार्षिक ब्याज के साथ लौटाने का निर्देश दिया है। इसके साथ ही आयोग ने उपभोक्ता को हुई मानसिक परेशानी और कानूनी खर्च के एवज में 10,000 रुपये का एकमुश्त मुआवजा देने का भी फैसला सुनाया है।
भुगतान के बाद भी अधूरा रहा काम
यह पूरा मामला 24 नवंबर 2021 का है, जब डॉ. विनय मोहन ने अपने घर के लिए ‘प्रीत ग्लास हाउस’ के प्रोपराइटर नवप्रीत से 93,433 रुपये का टफन ग्लास खरीदा था। इस कुल रकम में ग्लास की फिटिंग और लेबर चार्ज के रूप में 7,000 रुपये भी शामिल थे। हालांकि, रकम वसूलने के बावजूद दुकानदार ने ग्राहक के घर ग्लास लगाने की अपनी जिम्मेदारी पूरी नहीं की।
पीड़ित उपभोक्ता ने कई महीनों तक लगातार शोरूम के चक्कर लगाए और फोन पर संपर्क किया। 13 मई 2022 को फोन पर हुई बातचीत के दौरान डीलर ने डॉ. मोहन के परिजन को भरोसा दिलाया कि 14 मई को कारीगर भेजकर काम पूरा कर दिया जाएगा। जब यह वादा भी झूठा निकला, तो उपभोक्ता ने 17 मई 2022 को डीलर को कानूनी नोटिस भेजा, जो 20 मई को तामील हुआ। इसके बाद भी कोई कार्रवाई न होने पर डॉ. मोहन ने उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 की धारा 35 के तहत आयोग में शिकायत दर्ज कराई।
एकतरफा कार्रवाई और आयोग का फैसला
आयोग के अध्यक्ष कुलजीत पाल सिंह और सदस्य रणवीर कौर व रमेश कुमार गुप्ता की पीठ ने 9 जुलाई को इस मामले पर सुनवाई की। सुनवाई के दौरान उपभोक्ता आयोग की ओर से नोटिस भेजे जाने के बावजूद डीलर अदालत में पेश नहीं हुआ। इसके चलते 17 अक्टूबर 2022 को आयोग ने डीलर के खिलाफ एकतरफा (एक्स-पार्टी) कार्रवाई शुरू कर दी। डीलर के अनुपस्थित रहने से शिकायतकर्ता के दावे और पेश किए गए दस्तावेज बिना किसी विरोध के सही साबित हुए।
मामले के वित्तीय सबूतों की जांच करते हुए आयोग ने पाया कि बैंक खाते के विवरण के अनुसार 30 नवंबर 2021 को 50,000 रुपये और 3 दिसंबर 2021 को 41,000 रुपये का भुगतान किया गया था। कुल 91,000 रुपये के बैंक भुगतान का रिकॉर्ड मिलने पर आयोग ने रिफंड की राशि इसी सीमा तक तय की। शिकायतकर्ता का दावा था कि उसने बाकी 2,433 रुपये नकद दिए थे, लेकिन इसका कोई लिखित प्रमाण न होने के कारण आयोग ने इसे स्वीकार नहीं किया। इसके अलावा दूसरे ग्लास शोरूम के तीन बिलों को भी इस मामले से असंबंधित मानकर खारिज कर दिया गया।
लापरवाही पर लगा जुर्माना
आयोग ने अपने फैसले में कहा कि डीलर द्वारा पैसे लेने के बाद भी काम न करना स्पष्ट रूप से सेवा में कोताही और लापरवाही है। समय पर कांच न लगने से मकान मालिक को न सिर्फ मानसिक परेशानी झेलनी पड़ी, बल्कि घर की सुरक्षा को लेकर भी चिंता बनी रही। हालांकि, आयोग ने यह भी नोट किया कि कच्चे माल की भौतिक स्थिति या वह कहां रखा था, इससे संबंधित कोई दस्तावेज रिकॉर्ड पर पेश नहीं किए गए थे।
आयोग ने प्रीत ग्लास हाउस को शिकायत दर्ज कराने की तिथि से वसूली तक 91,000 रुपये पर 9 प्रतिशत प्रति वर्ष की दर से ब्याज का भुगतान करने का आदेश दिया। साथ ही 10,000 रुपये का मुआवजा जोड़ने के बाद उपभोक्ता का कुल दावा 1,01,000 रुपये (ब्याज के अलावा) बनता है।

