एम जे अकबर बनाम प्रिया रमानी मानहानि मामला: दिल्ली हाईकोर्ट 24 सितंबर को करेगा अंतिम सुनवाई

दिल्ली हाईकोर्ट ने सोमवार को पूर्व केंद्रीय मंत्री एम जे अकबर द्वारा पत्रकार प्रिया रमानी को आपराधिक मानहानि मामले में मिली बरी के खिलाफ दायर अपील को अंतिम सुनवाई के लिए 24 सितंबर को सूचीबद्ध कर दिया। यह मामला 2018 के #MeToo आंदोलन के दौरान रमानी द्वारा लगाए गए यौन उत्पीड़न के आरोपों से जुड़ा है।

न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा की एकल पीठ ने सुनवाई के दौरान बताया कि ट्रायल कोर्ट का पूरा रिकॉर्ड अदालत के समक्ष आ चुका है और दोनों पक्ष अपनी लिखित दलीलें दाखिल कर चुके हैं। अदालत ने कहा कि अब मामले को अगली तारीख पर अंतिम सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जाएगा।

दरअसल, एम जे अकबर ने 17 फरवरी 2021 को ट्रायल कोर्ट द्वारा दिए गए उस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी है, जिसमें प्रिया रमानी को आपराधिक मानहानि के मामले में बरी कर दिया गया था। ट्रायल कोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि किसी महिला को अपने साथ हुई शिकायत या अनुभव को किसी भी मंच पर रखने का अधिकार है, चाहे घटना को हुए कई दशक ही क्यों न बीत चुके हों।

दिल्ली हाईकोर्ट ने 13 जनवरी 2022 को अकबर की अपील पर विचार करने के लिए इसे स्वीकार किया था। इससे पहले अगस्त 2021 में रमानी को इस अपील पर नोटिस जारी किया गया था।

अपील में अकबर ने दलील दी है कि ट्रायल कोर्ट ने उनके मानहानि के मुकदमे का फैसला केवल “अनुमानों और अटकलों” के आधार पर किया। उनका कहना है कि अदालत ने रिकॉर्ड पर मौजूद सबूतों और प्रस्तुत तर्कों का सही ढंग से मूल्यांकन नहीं किया।

अकबर ने यह भी कहा है कि ट्रायल कोर्ट ने यह टिप्पणी कर गंभीर त्रुटि की कि उनकी प्रतिष्ठा “उत्कृष्ट” नहीं थी। उनके अनुसार, अदालत ने आपराधिक न्यायशास्त्र के स्थापित सिद्धांतों की अनदेखी करते हुए फैसला सुनाया।

यह विवाद 2018 में तब शुरू हुआ जब #MeToo आंदोलन के दौरान प्रिया रमानी ने अकबर पर कई वर्ष पहले यौन दुराचार के आरोप लगाए थे। इन आरोपों के बाद अकबर ने 15 अक्टूबर 2018 को रमानी के खिलाफ आपराधिक मानहानि की शिकायत दर्ज कराई थी।

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आरोप सार्वजनिक होने के दो दिन बाद, 17 अक्टूबर 2018 को एम जे अकबर ने केंद्रीय मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था।

2021 में ट्रायल कोर्ट ने रमानी को बरी करते हुए कहा था कि उनके खिलाफ लगाए गए आरोप सिद्ध नहीं हुए हैं। अदालत ने यह भी टिप्पणी की थी कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि ऐसे देश में, जहां महाभारत और रामायण जैसे ग्रंथ महिलाओं के सम्मान की बात करते हैं, वहां महिलाओं के खिलाफ अपराध अब भी हो रहे हैं।

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