दिल्ली आबकारी नीति मामला: हाईकोर्ट ने केजरीवाल-सिसोदिया को जवाब दाखिल करने के लिए समय दिया, मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा

दिल्ली हाईकोर्ट ने सोमवार को पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और अन्य प्रतिवादियों को केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) की उस याचिका पर जवाब दाखिल करने के लिए समय दे दिया है, जिसमें उन्हें शराब नीति मामले में आरोपमुक्त (डिस्चार्ज) करने के ट्रायल कोर्ट के फैसले को चुनौती दी गई है।

जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा की बेंच ने मामले की सुनवाई करते हुए अगली तारीख 6 अप्रैल तय की है। CBI ने कोर्ट में प्रतिवादियों को जवाब देने का मौका देने का कड़ा विरोध किया था, लेकिन हाईकोर्ट ने बचाव पक्ष को अपना रुख स्पष्ट करने के लिए समय देना जरूरी समझा।

हाईकोर्ट में तीखी बहस

सुनवाई के दौरान CBI की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने दलील दी कि प्रतिवादियों को पहले ही कई बार नोटिस दिए जा चुके हैं, इसलिए अब किसी औपचारिक जवाब की आवश्यकता नहीं है। मेहता ने कोर्ट से कहा कि ट्रायल कोर्ट का ‘डिस्चार्ज ऑर्डर’ एक अपवाद जैसा है और इसे ज्यादा समय तक रिकॉर्ड पर नहीं रहने देना चाहिए। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि इस देरी से न्याय व्यवस्था और याचिकाकर्ता के हितों को नुकसान पहुँच रहा है।

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वहीं, अरविंद केजरीवाल की ओर से पेश सीनियर एडवोकेट एन. हरिहरन ने दलील दी कि ट्रायल कोर्ट का फैसला करीब 500 पन्नों का है। उन्होंने कहा कि CBI द्वारा लगाए गए आरोपों का विस्तृत जवाब तैयार करने के लिए इतने बड़े दस्तावेज का बारीकी से अध्ययन करना अनिवार्य है।

सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया

इस कानूनी लड़ाई ने अब एक नया मोड़ ले लिया है। केजरीवाल और सिसोदिया ने संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर इस मामले को जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा की बेंच से किसी अन्य बेंच में ट्रांसफर करने की माँग की है।

आम आदमी पार्टी (AAP) की कानूनी टीम का कहना है कि उन्हें मौजूदा कार्यवाही की निष्पक्षता को लेकर चिंता है। याचिका में जस्टिस शर्मा द्वारा पिछली जमानत याचिकाओं की सुनवाई के दौरान की गई कुछ टिप्पणियों और हाल ही में ट्रायल कोर्ट की कार्यवाही पर लगाए गए स्टे का हवाला दिया गया है।

इससे पहले दिल्ली हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय ने इस मामले को प्रशासनिक स्तर पर ट्रांसफर करने की केजरीवाल की माँग को खारिज कर दिया था। चीफ जस्टिस ने स्पष्ट किया था कि रोस्टर के अनुसार यह मामला संबंधित जज को सौंपा गया है और रिक्यूजल (सुनवाई से हटने) का फैसला केवल संबंधित जज ही ले सकते हैं।

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क्या है पूरा मामला?

यह पूरा विवाद दिल्ली आबकारी नीति 2021-22 को तैयार करने और लागू करने में कथित अनियमितताओं और भ्रष्टाचार से जुड़ा है। CBI और प्रवर्तन निदेशालय (ED) का आरोप है कि इस नीति के जरिए शराब कारोबारियों को अनुचित लाभ पहुँचाया गया और बदले में रिश्वत ली गई। हालांकि ट्रायल कोर्ट ने केजरीवाल और सिसोदिया सहित कई नेताओं को डिस्चार्ज कर दिया था, लेकिन CBI अब इस आदेश को रद्द कराकर उनके खिलाफ फिर से मुकदमा चलाना चाहती है।

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