पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने राज्य में चल रही विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) प्रक्रिया के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। उन्होंने आरोप लगाया है कि यह प्रक्रिया मनमाने ढंग से चलाई जा रही है और इससे बड़े पैमाने पर मतदाताओं के नाम सूची से हटाए जा सकते हैं।
जानकारी के अनुसार, बनर्जी ने 28 जनवरी को याचिका दायर की है और इसमें भारत निर्वाचन आयोग (ECI) और पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी को पक्षकार बनाया गया है। सुप्रीम कोर्ट में यह मामला अब तक सूचीबद्ध नहीं हुआ है।
गौरतलब है कि शीर्ष अदालत पहले से ही SIR से संबंधित कई याचिकाओं पर सुनवाई कर रही है।
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इससे पहले 3 जनवरी को मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार को एक तीखा पत्र लिखकर SIR प्रक्रिया को तत्काल रोकने की मांग की थी। उन्होंने इस प्रक्रिया को “मनमानी और दोषपूर्ण” बताते हुए चेतावनी दी थी कि इसके चलते “बड़े पैमाने पर नागरिकों का मताधिकार छिन सकता है” और यह “लोकतंत्र की नींव पर सीधा हमला” होगा।
अपने पत्र में बनर्जी ने चुनाव आयोग पर “बिना योजना, खराब तैयारी और अव्यवस्थित” तरीके से काम करने का आरोप लगाते हुए कहा कि इस प्रक्रिया में “गंभीर अनियमितताएं, प्रक्रियागत उल्लंघन और प्रशासनिक चूक” सामने आई हैं।
चुनाव आयोग आमतौर पर मतदाता सूचियों को अपडेट करने के लिए विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान चलाता है, जिसमें पात्र मतदाताओं के नाम जोड़े और अपात्रों के नाम हटाए जाते हैं। लेकिन पश्चिम बंगाल सरकार का आरोप है कि इस बार यह प्रक्रिया बिना पर्याप्त तैयारी और राज्य सरकार से समन्वय के शुरू की गई है।
अब ममता बनर्जी की याचिका से सुप्रीम कोर्ट में पहले से लंबित मामलों को और बल मिल सकता है।
फिलहाल, सुप्रीम कोर्ट में इस नई याचिका की सुनवाई की तारीख तय नहीं हुई है।

