विजय अभिनीत फिल्म ‘जन नायकन’ को UA 16+ सर्टिफिकेट देने की याचिका पर मद्रास हाईकोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा

मद्रास हाईकोर्ट ने बुधवार को अभिनेता और टीवीके प्रमुख विजय की आगामी फिल्म जन नायकन को ‘UA 16+’ श्रेणी का सेंसर प्रमाणपत्र देने की मांग वाली याचिका पर अपना आदेश सुरक्षित रख लिया। यह याचिका फिल्म के निर्माता KVN प्रोडक्शंस LLP ने दायर की थी।

न्यायमूर्ति पी टी आशा ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद आदेश सुरक्षित रखा। सेंसर बोर्ड द्वारा फिल्म को एक समिति द्वारा देखे जाने के बाद रिव्यू कमेटी को भेजने के निर्णय को फिल्म निर्माताओं ने कोर्ट में चुनौती दी है।

ह. विनोथ द्वारा निर्देशित इस फिल्म में विजय के साथ प्रकाश राज, पूजा हेगड़े और ममिता बैजू प्रमुख भूमिकाओं में हैं। फिल्म को 18 दिसंबर 2025 को सेंसर बोर्ड के पास प्रमाणन के लिए भेजा गया था। 19 दिसंबर को बोर्ड की समिति ने फिल्म में कुछ दृश्य हटाने और संवादों को म्यूट करने की सलाह दी थी।

फिल्म निर्माताओं ने ये बदलाव स्वीकार कर लागू कर दिए, लेकिन इसके बावजूद सेंसर प्रमाणपत्र जारी नहीं किया गया। इसके बाद CBFC ने मामले को रिव्यू कमेटी के पास भेज दिया, जिस पर निर्माता पक्ष ने आपत्ति जताई।

केंद्र सरकार की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ए आर एल सुंदरसन ने अदालत को बताया कि पैनल के एक सदस्य ने फिल्म में धार्मिक भावनाएं आहत करने का आरोप लगाते हुए लिखित शिकायत दी थी। उन्होंने दलील दी कि यदि बाद में यह महसूस हो कि कुछ और दृश्य हटाए जाने चाहिए, तो बोर्ड समिति की सिफारिश के बावजूद मामला समीक्षा समिति को भेज सकता है।

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जैसा कि न्यायालय ने 6 जनवरी को निर्देश दिया था, CBFC ने शिकायत की प्रति न्यायालय में प्रस्तुत की।

निर्माता पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सतीश परासरन ने कहा कि समिति के अधिकांश सदस्यों ने फिल्म को UA प्रमाणपत्र देने की सिफारिश की थी। ऐसे में एक सदस्य की शिकायत के आधार पर निर्णय को रोका जाना उचित नहीं है।

उन्होंने कोर्ट को बताया कि निर्माता ने इस फिल्म में ₹500 करोड़ का निवेश किया है और इसकी रिलीज़ तारीख 9 जनवरी घोषित की जा चुकी है, जो पोंगल अवकाश से ठीक पहले है। उन्होंने तर्क दिया कि ऐसे में कोर्ट को हस्तक्षेप करने का अधिकार है।

उन्होंने यह भी कहा कि प्रक्रिया में पारदर्शिता नहीं है, और सेंसर बोर्ड के इस निर्णय की समीक्षा केवल केंद्र सरकार ही कर सकती है — न कि एक सदस्य की आपत्ति पर पूरी प्रक्रिया पलट दी जाए।

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CBFC की ओर से कोर्ट को बताया गया कि भले ही रिलीज़ डेट तय हो चुकी है, लेकिन फिल्म को तभी रिलीज़ किया जा सकता है जब उसे वैधानिक रूप से प्रमाणन प्राप्त हो जाए।

फिलहाल हाईकोर्ट ने आदेश सुरक्षित रखा है। फिल्म की प्रस्तावित रिलीज़ डेट नज़दीक होने के कारण यह आदेश निर्णायक साबित होगा कि फिल्म समय पर सिनेमाघरों में आ पाएगी या नहीं।

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