मद्रास हाईकोर्ट: गैर-रिश्तेदार अंगदाताओं को संदेह की दृष्टि से देखना उचित नहीं; DME को प्रत्यारोपण की अनुमति देने का निर्देश

मद्रास हाईकोर्ट ने स्टेज-V क्रॉनिक किडनी डिजीज से पीड़ित एक मरीज के लिए किडनी प्रत्यारोपण की अनुमति देने का निर्देश देते हुए कहा है कि गैर-रिश्तेदारों के बीच अंगदान को “अंकगणितीय पैमाने” पर नहीं परखा जा सकता और न ही उसे संदेह की दृष्टि से देखा जाना चाहिए।

न्यायमूर्ति पी.टी. आशा ने मरीज और प्रस्तावित डोनर द्वारा दायर याचिकाओं को स्वीकार करते हुए यह आदेश पारित किया। याचिकाओं में डायरेक्टोरेट ऑफ मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च (DME) की प्राधिकरण समिति को प्रत्यारोपण की अनुमति देने का निर्देश देने की मांग की गई थी।

याची मरीज स्टेज-V क्रॉनिक किडनी डिजीज से पीड़ित है और उसे किडनी प्रत्यारोपण की आवश्यकता है। प्रस्तावित डोनर मरीज के मौसी के पति के भाई हैं, जिन्होंने स्वेच्छा से अंगदान करने की इच्छा जताई।

हालांकि, DME की प्राधिकरण समिति ने प्रत्यारोपण की अनुमति देने से इनकार कर दिया, जिसके बाद मरीज और डोनर ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।

न्यायालय ने कहा कि केवल इस आधार पर कि डोनर निकट संबंधी नहीं है, अंगदान को संदेह की दृष्टि से नहीं देखा जा सकता।

READ ALSO  बेटी और भतीजी के यौन उत्पीड़न के आरोपों में अधिवक्ता को इलाहाबाद हाईकोर्ट से मिली जमानत

न्यायमूर्ति आशा ने कहा:

“गैर-रिश्तेदारों के बीच अंगदान को अंकगणितीय पैमानों पर परखना या संक्षिप्त कार्यवाही में उसे संदेह की दृष्टि से देखना अव्यावहारिक होगा।”

अदालत ने यह भी कहा कि कई बार संवेदनशील और करुणामय व्यक्ति अपने परिजनों या मित्रों को नया जीवन देने के लिए निःस्वार्थ भाव से अंगदान करते हैं और ऐसी स्थितियों को यांत्रिक तरीके से नहीं परखा जाना चाहिए।

न्यायालय ने आगे कहा:

“यह नहीं भूलना चाहिए कि कुछ करुणामय व्यक्ति अपने परिवार के सदस्य या मित्र को नया जीवन देने के लिए निःस्वार्थ भाव से अपने अंग दान करने को तैयार होते हैं।”

अदालत ने जीवन बचाने के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि यह सर्वोपरि है।

READ ALSO  बीमा की राशि- पत्नी या पिता कौन हकदार?जानिए मद्रास हाई कोर्ट का फैसला

न्यायालय ने पाया कि प्राधिकरण समिति द्वारा अनुमति से इनकार करना मनमाना और आधारहीन था।

हाईकोर्ट ने प्राधिकरण समिति के निर्णय को निरस्त करते हुए निर्देश दिया कि आदेश की प्रति प्राप्त होने की तिथि से तीन सप्ताह के भीतर कानून के अनुसार प्रत्यारोपण की अनुमति प्रदान की जाए

यह निर्णय स्पष्ट करता है कि व्यावसायिक अंग व्यापार को रोकने के लिए बने वैधानिक प्रावधानों का पालन आवश्यक है, किन्तु वास्तविक और करुणामूलक गैर-रिश्तेदार अंगदान को संदेह के आधार पर अस्वीकार नहीं किया जा सकता।

READ ALSO  इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बिना शर्त माफी मांगने के पर वकील के खिलाफ अवमानना कार्यवाही बंद की
Ad 20- WhatsApp Banner

Law Trend
Law Trendhttps://lawtrend.in/
Legal News Website Providing Latest Judgments of Supreme Court and High Court

Related Articles

Latest Articles