मद्रास हाईकोर्ट ने अभिनेता विजय की ₹1.5 करोड़ की आयकर पेनल्टी को चुनौती देने वाली याचिका खारिज की, ITAT में अपील की छूट दी

मद्रास हाईकोर्ट ने शुक्रवार को अभिनेता और तमिलगा वेत्रि कझगम (TVK) प्रमुख सी. जोसेफ विजय द्वारा दायर उस रिट याचिका को खारिज कर दिया जिसमें उन्होंने 2015–16 के वित्तीय वर्ष के दौरान ₹15 करोड़ की अतिरिक्त आय का स्वैच्छिक रूप से खुलासा न करने के आरोप में आयकर विभाग द्वारा ₹1.5 करोड़ की पेनल्टी लगाए जाने को चुनौती दी थी।

न्यायमूर्ति सेंथिलकुमार राममूर्ति ने कहा कि आयकर विभाग द्वारा आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 263 के तहत जारी शो-कॉज नोटिस “दो साल की निर्धारित समय सीमा के भीतर” जारी किया गया था। कोर्ट ने पेनल्टी कार्यवाही के गुण-दोष पर विचार करने से इनकार करते हुए कहा कि नोटिस में कोई कानूनी त्रुटि नहीं है।

हालांकि, कोर्ट ने विजय को इस पेनल्टी आदेश को अन्य आधारों पर आयकर अपीलीय न्यायाधिकरण (ITAT) में चुनौती देने की स्वतंत्रता दी।

सितंबर 2015 में आयकर विभाग ने धारा 132 के तहत विजय के निवास पर तलाशी (रेड) ली थी और कथित रूप से अघोषित आय का पता लगाने का दावा किया था। इसके बाद विजय ने असेसमेंट वर्ष 2016–17 के लिए ₹15 करोड़ की अतिरिक्त आय का खुलासा किया और उस पर कर भी अदा किया।

दिसंबर 2017 में विभाग ने मूल्यांकन आदेश जारी किया, जिसमें कुछ व्ययों (जैसे फैन क्लब “रसिगर मंद्रम” से संबंधित खर्च और डेप्रिसिएशन) को खारिज करते हुए विजय की कुल कर योग्य आय ₹38.25 करोड़ मानी गई।

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दिसंबर 2018 में विभाग ने आयकर अधिनियम की धारा 271AAB(1) के तहत पेनल्टी कार्यवाही शुरू की, जो तलाशी में पाई गई अघोषित आय से संबंधित है।

विजय ने उक्त मूल्यांकन आदेश को आयुक्त (अपील) के समक्ष चुनौती दी, जिसने आंशिक रूप से विजय के पक्ष में फैसला दिया। इसके बाद विभाग ITAT गया, जिसने कुछ कटौतियों को अस्वीकार करते हुए विभाग के पक्ष में आंशिक राहत दी।

इसी बीच विभाग ने जुलाई 2019 में मूल्यांकन आदेश को संशोधित करने के लिए धारा 263 के तहत शो-कॉज नोटिस जारी किया, यह कहते हुए कि पेनल्टी कार्यवाही विधिवत रूप से शुरू नहीं हुई थी।

विजय ने इस संशोधन कार्यवाही को ITAT में चुनौती दी, जिसने मई 2022 में इसे खारिज कर दिया और कहा कि जब पेनल्टी की कार्यवाही पहले ही चल रही है तो पुनरीक्षण (revision) का कोई उद्देश्य नहीं बचता।

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इसके बाद विजय ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर धारा 263 के नोटिस और पेनल्टी को समय-सीमा और अन्य कानूनी आधारों पर चुनौती दी। विजय का तर्क था कि विभाग ITAT के आदेश की गलत व्याख्या कर रहा है और पेनल्टी लगाने की समय-सीमा पहले ही समाप्त हो चुकी थी।

आयकर विभाग ने याचिका का विरोध किया और कहा कि पेनल्टी विधिसम्मत और समय पर लगाई गई है।

न्यायमूर्ति राममूर्ति ने विजय द्वारा उठाए गए “सीमावधि” के तर्क को अस्वीकार करते हुए कहा कि विभाग द्वारा जारी किया गया नोटिस वैध है और निर्धारित अवधि के भीतर जारी किया गया था। उन्होंने कहा:

“नोटिस के निर्गमन में मुझे कोई कानूनी त्रुटि नहीं दिखी।”

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हालांकि, उन्होंने यह स्पष्ट किया कि विजय पेनल्टी आदेश को अन्य उचित आधारों पर ITAT में चुनौती दे सकते हैं।

  • धारा 132 – आयकर विभाग को तलाशी और जब्ती (search & seizure) की शक्तियां देती है।
  • धारा 263 – ऐसे मूल्यांकन आदेशों में सुधार का प्रावधान देती है जो “त्रुटिपूर्ण” हों और “राजस्व के हितों के प्रतिकूल” हों।
  • धारा 271AAB(1) – तलाशी के दौरान उजागर हुई अघोषित आय पर जुर्माना लगाने से संबंधित है।

इस फैसले से विजय की रिट याचिका तो खारिज हो गई है, लेकिन उन्हें आयकर अपीलीय न्यायाधिकरण में वैकल्पिक कानूनी उपायों की छूट मिल गई है।

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