सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को मध्य प्रदेश सरकार को निर्देश दिया कि वह राज्य के मंत्री कुँवर विजय शाह के खिलाफ भारतीय सेना की अफसर कर्नल सोफिया कुरैशी पर की गई कथित आपत्तिजनक टिप्पणी के मामले में अभियोजन की स्वीकृति देने पर कानून के अनुसार दो सप्ताह में अंतिम निर्णय ले।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ ने यह आदेश उस समय दिया जब कोर्ट को बताया गया कि शीर्ष अदालत द्वारा गठित विशेष जांच दल (SIT) ने अपनी जांच पूरी कर ली है और अंतिम रिपोर्ट कोर्ट में सीलबंद लिफाफे में सौंप दी है।
“आप (राज्य सरकार) 19 अगस्त 2025 से इस रिपोर्ट पर बैठे हुए हैं। क़ानून के तहत आप पर एक बाध्यता है और आपको निर्णय लेना ही होगा। अब जनवरी 2026 चल रहा है,” मुख्य न्यायाधीश ने कहा।
SIT ने अपनी रिपोर्ट में कुँवर विजय शाह पर ‘भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 196’ के तहत अभियोजन की सिफारिश की है, जो धर्म, जाति आदि के आधार पर वैमनस्य फैलाने से संबंधित अपराधों के लिए अभियोजन से पहले राज्य की अनुमति अनिवार्य बनाती है।
राज्य सरकार की ओर से पेश वकील ने कहा कि चूंकि मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित था, इसलिए अब तक कार्रवाई नहीं की गई। इस पर कोर्ट ने कहा कि मामला लंबित होना राज्य सरकार को क़ानूनी कर्तव्य निभाने से नहीं रोकता।
“जांच पूरी हो चुकी है, अब राज्य सरकार को निर्णय लेना होगा,” कोर्ट ने कहा और आदेश दिया कि दो सप्ताह के भीतर कानून के अनुसार निर्णय लेकर रिपोर्ट दाखिल की जाए।
SIT रिपोर्ट में मंत्री विजय शाह द्वारा की गई अन्य आपत्तिजनक टिप्पणियों का भी ज़िक्र किया गया है। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया कि SIT उन अन्य मामलों की भी जांच करे और अलग से रिपोर्ट पेश करे, जिसमें यह बताया जाए कि उनके विरुद्ध क्या कार्रवाई की जा सकती है।
कोर्ट ने विजय शाह की अब तक की भूमिका पर असंतोष जताया। पिछली सुनवाई में शाह की ओर से कहा गया था कि उन्होंने ऑनलाइन सार्वजनिक माफ़ी जारी की थी, जिसे रिकॉर्ड पर लाया जाएगा।
“ऑनलाइन माफ़ी क्या होती है? हमें अब उनकी मंशा और सद्भावना पर शक हो रहा है,” कोर्ट ने पहले कहा था।
इस पर आज मुख्य न्यायाधीश ने दोहराया —
“अब माफ़ी देने का समय निकल चुका है। हम पहले ही कह चुके हैं कि जो माफ़ी दी गई थी, वह कैसी थी।”
कुँवर विजय शाह का एक वीडियो सामने आया था जिसमें उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान मीडिया ब्रीफिंग में शामिल रहीं सेना अधिकारी कर्नल सोफिया कुरैशी पर कथित रूप से आपत्तिजनक और सांप्रदायिक टिप्पणी की थी। इस पर मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने उन्हें फटकार लगाते हुए उनकी भाषा को “नाली की भाषा” बताया था और धार्मिक वैमनस्य फैलाने के आरोप में FIR दर्ज करने का आदेश दिया था।
बाद में सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट की कार्यवाही पर रोक लगाते हुए SIT का गठन किया था और रिपोर्ट मांगी थी। शाह ने बाद में कहा था कि वह कर्नल कुरैशी को अपनी बहन से भी अधिक सम्मान देते हैं।
अब सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश के बाद, मध्य प्रदेश सरकार को तय करना होगा कि क्या वह शाह के खिलाफ अभियोजन की अनुमति देती है या नहीं। साथ ही SIT को उनकी अन्य टिप्पणियों पर भी विस्तृत जांच करनी होगी।

