21 नवंबर को केरल की याचिका पर सुनवाई करेगा सुप्रीम कोर्ट, मतदाता सूची संशोधन स्थगित करने की मांग

सुप्रीम कोर्ट 21 नवंबर को केरल सरकार की वह याचिका सुनेगा, जिसमें राज्य में चल रहे स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) यानी मतदाता सूची के विशेष गहन संशोधन को स्थगित करने का अनुरोध किया गया है। यह मामला मंगलवार को मुख्य न्यायाधीश मुख्य न्यायाधीश बी. आर. गवई के समक्ष उल्लेख किया गया, जिन्होंने संकेत दिया कि याचिका पर सुनवाई शुक्रवार को होगी।

केरल ने चुनाव आयोग को SIR को टालने का निर्देश देने की मांग करते हुए कहा कि 4 नवंबर से 4 दिसंबर तक चलने वाला यह संशोधन कार्यक्रम सीधे-सीधे स्थानीय निकाय चुनावों से टकरा रहा है। दोनों प्रक्रियाएँ एक ही समय पर चलने से प्रशासनिक तंत्र पर असाधारण दबाव पड़ेगा और स्थिति “प्रशासनिक गतिरोध” जैसी हो सकती है।

याचिका में कहा गया कि SIR एक बेहद विस्तृत और श्रम-प्रधान प्रक्रिया है। इसमें

  • 1,76,000 सरकारी और अर्द्ध-सरकारी कर्मियों,
  • 68,000 पुलिस और सुरक्षा कर्मियों,
  • और 25,668 अतिरिक्त कर्मचारियों
    की आवश्यकता होती है।
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राज्य का कहना है कि प्रशिक्षित चुनावकर्मियों का पूल सीमित है और दो बड़े चुनावी कार्य एक साथ पूरा करना “लगभग असंभव” होगा।

याचिका में कहा गया, “प्रशिक्षित और चुनाव-अनुभवी कर्मियों की संख्या सीमित है… SIR और स्थानीय निकाय चुनाव दोनों के लिए इतनी बड़ी संख्या में कर्मचारियों को एक साथ उपलब्ध कराना लगभग असंभव है और इससे राज्य प्रशासनिक गतिरोध में फंस सकता है।”

केरल में कुल 1,200 स्थानीय स्वशासन संस्थाएँ हैं, जिनमें 941 ग्राम पंचायत, 152 ब्लॉक पंचायत, 14 जिला पंचायत, 87 नगरपालिका और छह निगम शामिल हैं। ये संस्थाएँ कुल 23,612 वार्डों को कवर करती हैं।

संविधान के अनुच्छेद 243-E और 243-U, केरल पंचायत राज अधिनियम और नगर पालिका अधिनियम के तहत चुनाव 21 दिसंबर 2025 से पहले पूरा होना अनिवार्य है।

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राज्य चुनाव आयोग ने कार्यक्रम घोषित कर दिया है:

  • 9 दिसंबर: तिरुवनंतपुरम, कोल्लम, पथानमथिट्टा, अलप्पुझा, कोट्टायम, इडुक्की, एर्नाकुलम
  • 11 दिसंबर: त्रिशूर, पलक्कड़, मलप्पुरम, कोझिकोड, वायनाड, कन्नूर, कासरगोड

नामांकन वापसी की अंतिम तिथि 24 नवंबर है, मतगणना 13 दिसंबर को होगी और पूरी प्रक्रिया 18 दिसंबर तक पूरी करनी होगी।

राज्य ने बताया कि केरल के मुख्य चुनाव अधिकारी पहले ही साफ कर चुके हैं कि स्थानीय निकाय चुनावों में लगे कर्मचारी SIR के लिए नहीं भेजे जा सकते। चुनाव प्रक्रिया के लिए बड़ी और विशेषज्ञ टीम की आवश्यकता होती है—रिटर्निंग ऑफिसर, असिस्टेंट रिटर्निंग ऑफिसर, इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर, सेक्टर अधिकारी, प्रशिक्षण दल, प्रीसाइडिंग ऑफिसर, पोलिंग ऑफिसर और EVM जांच करने वाले अधिकारी।

राज्य ने जोर देकर कहा, “इन कर्मचारियों को बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) नियुक्त नहीं किया जाना चाहिए।” ऐसा करने से चुनाव की सुचारु और समयबद्ध संचालन की क्षमता प्रभावित होगी।

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हालांकि केरल सरकार SIR की संवैधानिक वैधता को लेकर अपनी मूल चुनौती जारी रखे हुए है, लेकिन उसने स्पष्ट किया कि यह याचिका केवल समय-निर्धारण पर केंद्रित है।

अब मामला शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के लिए सूचीबद्ध है।

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