डेंटल छात्र की मौत के बाद हड़ताल में हिंसा: केरल हाईकोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेकर जारी किया नोटिस

केरल हाईकोर्ट ने मंगलवार को राज्य के विभिन्न दलित संगठनों द्वारा बुलाई गई देशव्यापी हड़ताल (हड़ताल) के दौरान हुई हिंसा और सार्वजनिक अव्यवस्था की खबरों पर स्वतः संज्ञान लिया है। हाईकोर्ट ने राज्य पुलिस प्रमुख को शाम तक रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है और हड़ताल का आह्वान करने वाले संगठनों को नोटिस जारी किया है।

यह हड़ताल कन्नूर के एक डेंटल कॉलेज के छात्र नितिन राज की मृत्यु के मामले में न्याय की मांग को लेकर आयोजित की गई थी। सुबह 6 बजे से शाम 6 बजे तक चली इस विरोध प्रदर्शनी का नेतृत्व ‘जस्टिस फॉर नितिन राज एक्शन काउंसिल’ सहित लगभग 52 संगठनों ने किया था।

जस्टिस बसंत बालाजी और जस्टिस पी. कृष्णा कुमार की अवकाश पीठ ने उन मीडिया रिपोर्ट्स के आधार पर मामले की सुनवाई की, जिनमें दिखाया गया कि इस विरोध प्रदर्शन ने पूरे केरल में जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया है।

अदालत ने पाया कि हड़ताल के कारण वेल्लूर इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा (VITEEE) में शामिल होने वाले छात्र केंद्रों तक नहीं पहुँच पाए। इसके अलावा, अस्पतालों की ओर जाने वाले मरीजों को भी भारी ट्रैफिक और अवरोधों का सामना करना पड़ा।

हाईकोर्ट ने अपने पिछले कई फैसलों का हवाला देते हुए स्पष्ट किया कि हड़ताल या बंद के दौरान सार्वजनिक या सरकारी संपत्ति को होने वाला कोई भी नुकसान असंवैधानिक है। कोर्ट ने चेतावनी दी कि इस तरह की गतिविधियाँ अदालती अवमानना की कार्यवाही का आधार बन सकती हैं, और नुकसान की भरपाई के लिए प्रदर्शनकारी जिम्मेदार ठहराए जा सकते हैं।

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विरोध प्रदर्शन की मुख्य वजह अंजराकंडी, कन्नूर के एक निजी डेंटल कॉलेज के प्रथम वर्ष के छात्र नितिन राज की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत है। 10 अप्रैल को नितिन एक इमारत से गिरने के बाद गंभीर रूप से घायल पाए गए थे, जिन्होंने बाद में अस्पताल में दम तोड़ दिया।

नितिन के परिवार ने आरोप लगाया है कि कॉलेज में उनके साथ जाति और रंग के आधार पर उत्पीड़न किया गया था। इस शिकायत के आधार पर, पुलिस ने कॉलेज के दो फैकल्टी सदस्यों के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने और एससी/एसटी (अत्याचार निवारण) अधिनियम की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है।

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हालांकि आयोजकों ने घोषणा की थी कि आवश्यक सेवाओं को बाधित नहीं किया जाएगा और वाहनों को जबरन नहीं रोका जाएगा, लेकिन राज्य के कई हिस्सों से इसके विपरीत खबरें आईं। प्रदर्शनकारियों ने कई जगहों पर वाहनों को रोका और दुकानों को जबरन बंद करवाया।

हाईकोर्ट ने अब इस पूरी घटना पर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है और पुलिस से पूछा है कि हिंसा रोकने और कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए क्या कदम उठाए गए।

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