कोच्चि में तीन मौतों के बाद केरल हाईकोर्ट सख्त, सरकार से कहा- तेज रफ्तार गाड़ियों की पुलिस को तुरंत सूचना देने वाला सिस्टम बनाएं

केरल हाईकोर्ट ने गुरुवार को राज्य सरकार को कड़े निर्देश देते हुए कहा कि ओवरस्पीडिंग और बेलगाम ड्राइविंग की तुरंत पुलिस को सूचना देने के लिए आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया जाए। अदालत ने साफ कहा कि अगर समय रहते निगरानी तंत्र काम करता, तो हाल ही में कोच्चि के पास लग्जरी कार से हुए उस भीषण हादसे को टाला जा सकता था जिसमें तीन युवाओं की जान चली गई।

राज्य में लगातार बढ़ रही सड़क दुर्घटनाओं पर खुद संज्ञान लेकर सुनवाई कर रही जस्टिस राजा विजयराघवन वी और जस्टिस के वी जयकुमार की खंडपीठ ने रोड सेफ्टी फंड से एक एकीकृत प्लेटफॉर्म तैयार करने का सुझाव दिया। अदालत ने कहा कि राज्य भर में ऑटोमैटिक नंबर प्लेट पहचान प्रणाली से लैस जो एआई कैमरे लगे हैं, उन्हें किसी भी तेज रफ्तार गाड़ी को पकड़ते ही सीधे पुलिस को अलर्ट भेजना चाहिए।

हाईकोर्ट ने केल्ट्रॉन से मांगा ओवरस्पीडिंग का पूरा ब्योरा

इस मामले में कैमरों का प्रबंधन देखने वाली सरकारी कंपनी केरल स्टेट इलेक्ट्रॉनिक्स डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड (केल्ट्रॉन) की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठे। खंडपीठ ने केल्ट्रॉन से पूछा कि पिछले दो महीनों में एआई कैमरों ने कितनी तेज रफ्तार गाड़ियों को रिकॉर्ड किया, इनमें से कितने मामलों की जानकारी पुलिस या संबंधित अधिकारियों को भेजी गई और उन पर क्या कार्रवाई हुई।

अदालत ने कहा कि इस दर्दनाक हादसे का आरोपी लड़का इससे पहले 210 किलोमीटर प्रति घंटे से अधिक की रफ्तार से गाड़ी चला रहा था। जजों ने कहा कि अगर कैमरों ने उसी समय इस उल्लंघन को पकड़कर पुलिस को सतर्क कर दिया होता, तो यह हादसा रुक सकता था। अदालत ने टिप्पणी की कि आज हर चीज के लिए तकनीक मौजूद है, लेकिन सरकार उसका सही इस्तेमाल नहीं कर पा रही है।

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नेदुम्बस्सेरी हादसे में गई थीं तीन जानें

यह पूरा मामला 11 अक्टूबर की सुबह कोच्चि के पास नेदुम्बस्सेरी में हुए हादसे से जुड़ा है। यहां कथित तौर पर शराब के नशे में 19 वर्षीय सुहैल नाम के युवक ने अपनी तेज रफ्तार लग्जरी कार से एक स्कूटर को टक्कर मार दी थी। इस दुर्घटना में स्कूटर सवार लगभग 21 वर्ष की आयु के तीन युवाओं की मौत हो गई थी, जिनमें दो युवतियां शामिल थीं।

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मृतक बच्चों के परिवारों पर टूटे दुखों के पहाड़ का जिक्र करते हुए पीठ ने चेतावनी दी कि अगर सरकार ने ठोस कदम नहीं उठाए, तो स्थिति और ज्यादा बिगड़ जाएगी। अदालत ने सरकार से पूछा कि वह हादसों पर पूरी तरह लगाम लगाने वाला ऐसा तकनीकी प्लेटफॉर्म कब तक तैयार कर सकती है, इसकी समयसीमा बताए।

मुख्य सचिव को निगरानी की जिम्मेदारी, पुराने निर्देशों को तत्काल लागू करने का आदेश

हाईकोर्ट ने केरल के मुख्य सचिव को इस पूरी प्रक्रिया की निगरानी और विभागों के बीच समन्वय के लिए नोडल अधिकारी नियुक्त किया है। अदालत ने दो टूक कहा कि अलग-अलग महकमों का हवाला देकर जिम्मेदारी से नहीं बचा जा सकता और न ही कार्रवाई में देरी की जा सकती है। सभी संबंधित पक्षों को अगली सुनवाई पर उठाए गए कदमों, जिम्मेदार अधिकारियों और समयसीमा की पूरी जानकारी पेश करनी होगी।

इसके साथ ही अदालत ने अपने पहले के आदेशों को तय समयसीमा के भीतर लागू करने को कहा है, जिनमें शामिल हैं:

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— राज्य के सभी हाईवे और प्रमुख जिला सड़कों का सुरक्षा सर्वे कराना। — सार्वजनिक परिवहन की बसों के लिए लेन व्यवस्था का कड़ाई से पालन कराना, ताकि समय पर पहुंचने की होड़ में वे ओवरटेक या तेज ड्राइविंग न करें। — हाईवे के किनारों पर अवैध रूप से खड़े वाहनों पर पूरी तरह रोक लगाना। — ड्राइवरों की प्रोफाइलिंग प्रणाली बनाना, जिसके तहत 10 से अधिक चालान कटने पर ड्राइविंग लाइसेंस रद्द किया जाए। — सभी जिलों में बिना किसी देरी के जिला सड़क सुरक्षा समितियां गठित करना।

हाईकोर्ट ने इस मामले की अगली सुनवाई 3 नवंबर तय की है।

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