केरल हाईकोर्ट ने आय से अधिक संपत्ति के मामले में दोषी ठहराए गए पूर्व पुलिस महानिदेशक (DGP) टोमिन जे थाचंकरी की चार साल की जेल की सजा पर रोक लगा दी है। कोर्ट ने उन्हें सशर्त जमानत देते हुए निचली अदालत द्वारा लगाए गए 30.84 लाख रुपये के जुर्माने की 75 प्रतिशत राशि जमा करने का निर्देश दिया है।
जस्टिस ए बदरुद्दीन ने गुरुवार को थाचंकरी की दोषसिद्धि के खिलाफ दायर अपील पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया। हाईकोर्ट के आदेश के बाद उन्हें तिरुवनंतपुरम के पूजप्पुरा स्थित सेंट्रल जेल एवं सुधार गृह से रात 8:30 बजे रिहा कर दिया गया।
जेल के एक अधिकारी के अनुसार, हाईकोर्ट का आदेश रात करीब 8 बजे प्राप्त हुआ था और इसके आधे घंटे बाद थाचंकरी को रिहा कर दिया गया।
निचली अदालत के निष्कर्षों में फिलहाल कोई खामी नहीं: हाईकोर्ट
सजा पर रोक लगाते हुए हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि पूर्व DGP जांच अधिकारी के सामने अपनी ज्ञात आय से अधिक अर्जित संपत्ति का हिसाब देने के लिए जरूरी दस्तावेज और अन्य सामग्री पेश नहीं कर सके थे।
जस्टिस बदरुद्दीन ने कहा कि प्रथम दृष्टया विशेष अदालत के निष्कर्षों में कोई खामी नहीं दिखाई देती। हालांकि, कोर्ट ने माना कि इस मामले में केवल चार साल की सजा सुनाई गई है। ऐसे में राज्य सरकार के विरोध के बावजूद न्यायहित में आवश्यक शर्तों के साथ सजा पर रोक लगाई जा सकती है।
हाईकोर्ट ने थाचंकरी को पहले जुर्माने की 75 प्रतिशत राशि जमा करने का निर्देश दिया। इसके बाद उन्हें एक सप्ताह के भीतर पांच लाख रुपये का जमानती बॉन्ड और दो सक्षम जमानतदार पेश करने होंगे।
कोर्ट ने साफ किया कि जुर्माने की निर्धारित राशि जमा किए बिना न तो जमानती बॉन्ड स्वीकार किया जाएगा और न ही उन्हें जमानत पर रिहा किया जा सकेगा।
हाईकोर्ट ने यह शर्त भी लगाई कि थाचंकरी उसकी पूर्व अनुमति के बिना भारत से बाहर नहीं जा सकेंगे।
इसके अलावा, कोर्ट ने चेतावनी दी कि यदि वह किसी अन्य आपराधिक मामले में शामिल पाए जाते हैं और इसकी जानकारी कोर्ट को मिलती है, तो उनकी सजा पर रोक लगाने वाला आदेश और जमानत दोनों रद्द किए जा सकते हैं।
संपत्ति के आकलन में गलतियों का आरोप
थाचंकरी ने विजिलेंस कोर्ट के फैसले को चुनौती देते हुए अपनी अपील में दावा किया है कि जांच अधिकारियों ने उनकी संपत्ति और आय की गणना में गंभीर गलतियां की थीं। उनका कहना है कि निचली अदालत ने सबूतों का सही तरीके से मूल्यांकन नहीं किया और गलत गणनाओं के आधार पर उन्हें दोषी ठहराया।
अपील के अनुसार, सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने शुरुआत में 1 जनवरी 2003 से 1 मार्च 2005 के बीच कथित रूप से अर्जित आय से अधिक संपत्ति की जांच के लिए एफआईआर दर्ज की थी। बाद में जांच की अवधि बढ़ाकर 4 जुलाई 2007 तक कर दी गई।
जांच एजेंसी ने 4 जुलाई 2007 को कई परिसरों में तलाशी लेकर दस्तावेज जब्त किए थे। जांच पूरी होने के बाद अंतिम रिपोर्ट दाखिल की गई।
इसके बाद मामला अलग-अलग विजिलेंस कोर्ट में स्थानांतरित होता रहा और वर्ष 2020 में कोट्टायम की विजिलेंस कोर्ट में पहुंचा।
आय के कई स्रोतों को नजरअंदाज करने का दावा
पूर्व DGP ने अपनी अपील में कहा है कि जांच अधिकारियों ने उनकी आय के कई स्रोतों को गणना में शामिल नहीं किया था। उन्होंने जांच के दौरान संपत्ति के मूल्यांकन और आय की गणना में गलतियां होने का भी आरोप लगाया।
थाचंकरी की शिकायत के बाद राज्य सरकार ने मामले की आगे जांच कराने का आदेश दिया था। हालांकि, बाद में हाईकोर्ट ने यह कहते हुए सरकार का आदेश रद्द कर दिया कि सरकार इस तरह की अतिरिक्त जांच का आदेश नहीं दे सकती।
इसके बावजूद हाईकोर्ट ने जांच एजेंसी को अतिरिक्त जांच के दौरान एकत्र किए गए सबूतों का इस्तेमाल करने की अनुमति दी थी।
अतिरिक्त जांच के दस्तावेज अदालत में पेश नहीं किए गए: अपील
थाचंकरी ने आरोप लगाया है कि अतिरिक्त जांच के दौरान जुटाए गए दस्तावेज निचली अदालत के सामने पेश नहीं किए गए। उन्होंने दावा किया कि केरल क्रिमिनल रूल्स ऑफ प्रैक्टिस के नियम 19(4) के तहत आवेदन देने के बावजूद इन दस्तावेजों को अदालत के रिकॉर्ड पर नहीं लाया गया।
अपील में उन्होंने यह भी बताया कि ट्रायल के दौरान दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 313 के तहत पूछताछ में उन्होंने अपने खिलाफ सामने रखी गई परिस्थितियों से इनकार किया था।
इसके अलावा, उन्होंने एक अतिरिक्त बयान दाखिल कर आय और संपत्ति की गणना में कथित गलतियों तथा खुद को झूठे मामले में फंसाए जाने से जुड़ी परिस्थितियों को स्पष्ट करने का दावा किया।
थाचंकरी का कहना है कि निचली अदालत ने सबूतों का गलत मूल्यांकन किया और जांच अधिकारियों की त्रुटिपूर्ण गणनाओं पर भरोसा किया। इसी आधार पर उन्होंने दोषसिद्धि को गैरकानूनी बताते हुए उसे रद्द करने की मांग की है।
फिलहाल हाईकोर्ट ने निर्धारित शर्तों के साथ उनकी चार साल की सजा पर रोक लगाई है। दोषसिद्धि को चुनौती देने वाली उनकी अपील अभी लंबित है।

