केरल हाईकोर्ट ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) और यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (POCSO) अधिनियम के तहत यौन उत्पीड़न के आरोपी 36 वर्षीय व्यक्ति को नियमित जमानत प्रदान की है। हाईकोर्ट ने पाया कि प्रथम सूचना विवरण (FIS) से पता चलता है कि आरोपी और नाबालिग पीड़िता के बीच आपसी सहमति से संबंध थे।
जस्टिस कौसर एडप्पागथ की एकल पीठ ने 20 फरवरी 2026 को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 (BNSS) की धारा 483 के तहत दायर जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किया।
मामले की पृष्ठभूमि
याचिकाकर्ता, अब्दुल मलिक, मलप्पुरम जिले के निलांबुर पुलिस स्टेशन में दर्ज अपराध संख्या 1163/2025 में आरोपी था। अभियोजन पक्ष का आरोप था कि 21 जुलाई 2025 और अगस्त 2025 के पहले शुक्रवार को, आरोपी ने नाबालिग पीड़िता के घर में अनाधिकार प्रवेश किया और उसके साथ अश्लील हरकतें कीं।
आरोप यह भी था कि 25 नवंबर 2025 को आरोपी ने निलांबुर बाईपास पर अपनी गाड़ी में और बाद में अपनी दुकान में पीड़िता के साथ यौन उत्पीड़न किया। इसके परिणामस्वरूप, आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धाराओं और POCSO अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया था। आरोपी 31 दिसंबर 2025 से न्यायिक हिरासत में था।
पक्षकारों की दलीलें
आरोपी के वकील श्री एम. देवेश ने तर्क दिया कि उनके मुवक्किल को इस मामले में गलत तरीके से फंसाया गया है और वह निर्दोष है। उन्होंने दलील दी कि रिकॉर्ड पर ऐसा कोई सबूत मौजूद नहीं है जो आरोपी को इस कथित अपराध से जोड़ सके, इसलिए उसे जमानत दी जानी चाहिए।
वहीं, वरिष्ठ लोक अभियोजक श्री एम.सी. आशी ने जमानत का विरोध करते हुए कहा कि कथित घटना आरोपी के सोचे-समझे आपराधिक कृत्यों का हिस्सा थी। उन्होंने तर्क दिया कि इस स्तर पर आरोपी को जमानत नहीं मिलनी चाहिए। हालांकि पीड़िता को नोटिस भेजा गया था, लेकिन उसकी ओर से कोई पेश नहीं हुआ।
हाईकोर्ट का विश्लेषण और निर्णय
केस डायरी और प्रथम सूचना विवरण (FIS) का अवलोकन करने के बाद हाईकोर्ट ने उल्लेख किया कि जांच लगभग पूरी हो चुकी है। आरोपों की प्रकृति पर टिप्पणी करते हुए हाईकोर्ट ने कहा:
“FIS को पढ़ने से पता चलता है कि आरोपी और पीड़िता को एक-दूसरे से प्यार हो गया था, पीड़िता ने आरोपी को अपने घर बुलाया था और उन्होंने कई बार शारीरिक संबंध बनाए थे।”
हाईकोर्ट ने निष्कर्ष निकाला कि आरोपी को आगे हिरासत में रखने का कोई ठोस कारण नजर नहीं आता। इसी आधार पर आरोपी को जमानत देने का आदेश दिया गया।
जमानत की शर्तें:
- मुचलका: आरोपी को ₹1,00,000 के बांड और इतनी ही राशि के दो स्थानीय जमानतदारों के साथ रिहा किया जाएगा।
- जांच में सहयोग: आरोपी को जांच में पूरी तरह सहयोग करना होगा।
- हाजिरी: उसे अगले आदेश तक प्रत्येक शनिवार सुबह 10:00 से 11:00 बजे के बीच जांच अधिकारी के सामने पेश होना होगा।
- आचरण: जमानत पर रहते हुए आरोपी इस तरह का कोई अन्य अपराध नहीं करेगा।
- गवाहों से संपर्क: आरोपी अभियोजन पक्ष के गवाहों से संपर्क करने या सबूतों के साथ छेड़छाड़ करने की कोशिश नहीं करेगा।
- यात्रा प्रतिबंध: आरोपी निचली अदालत की अनुमति के बिना केरल राज्य से बाहर नहीं जाएगा।
- केस शीर्षक: अब्दुल मलिक बनाम केरल राज्य
- केस संख्या: बेल एप्लिकेशन नंबर 554/2026

