केरल हाईकोर्ट में अठिराप्पिल्ली-कल्लाल प्लांटेशन में अनानास खेती रोकने की मांग; चालाकुडी नदी पर पारिस्थितिक खतरे का आरोप

अठिराप्पिल्ली और कल्लाल प्लांटेशन क्षेत्रों में अनानास की खेती पर तत्काल रोक लगाने की मांग को लेकर केरल हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका दाखिल की गई है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि यह गतिविधि गंभीर पारिस्थितिक जोखिम पैदा कर रही है और वन विभाग के निर्देशों की अवहेलना की जा रही है।

यह याचिका वन्यजीव कार्यकर्ता एंजेल्स नायर ने दायर की है। याचिका में कहा गया है कि केरल प्लांटेशन कॉरपोरेशन वन विभाग द्वारा जारी स्टॉप मेमो और आपत्ति के बावजूद अनानास की खेती जारी रखे हुए है।

याचिकाकर्ता के अनुसार, वन विभाग और प्लांटेशन कॉरपोरेशन के बीच 1970 में हुआ 50 वर्ष का पट्टा समझौता छह वर्ष पहले समाप्त हो चुका है, इसके बावजूद खेती की जा रही है।

याचिका में कहा गया है कि अनानास की मोनोकल्चर खेती में भारी मात्रा में रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों का उपयोग होता है, जो चालाकुडी नदी में बहकर पहुंचते हैं। इससे मिट्टी का कटाव, वन्यजीवों के भोजन और चारे के स्रोतों में कमी तथा मानव-वन्यजीव संघर्ष में वृद्धि हो रही है।

याचिका में यह भी दावा किया गया है कि कीटनाशकों से चालाकुडी नदी का प्रदूषण “तीन मिलियन मानव जीवन और लाखों वनस्पतियों व जीवों” के लिए खतरा है।

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याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट से प्लांटेशन क्षेत्रों में अनानास की खेती पर तत्काल रोक लगाने का निर्देश देने की मांग की है।

मामले पर हाईकोर्ट में अभी सुनवाई होना बाकी है।

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