कर्नाटक हाईकोर्ट ने 3.5 साल के बच्चे की हत्या के दोषी की दोषसिद्धि (conviction) को बरकरार रखा है, लेकिन उसकी सजा में महत्वपूर्ण संशोधन किया है। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि सत्र न्यायालयों (Sessions Courts) के पास ‘प्राकृतिक मृत्यु तक’ (until natural death) आजीवन कारावास की सजा सुनाने की शक्ति नहीं है। न्यायमूर्ति एच.पी. संदेश
