विदेश में नौकरी दिलाने के नाम पर धोखाधड़ी और सेवा में कोताही बरतने के एक मामले में कन्नूर जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने कड़ा रुख अपनाया है। आयोग ने एक विदेशी भर्ती कंसल्टेंसी, उसके प्रबंधकों और एक ट्रेवल एजेंसी को निर्देश दिया है कि वे केरल वाटर अथॉरिटी में कार्यरत एक संविदा सुपरवाइजर को 3.16 लाख रुपये का भुगतान करें। कंसल्टेंसी ने पीड़ित से महीनों तक अलग-अलग मदों में पैसे वसूले, लेकिन वादा किए जाने के बावजूद उसे विदेश में नौकरी नहीं दिला सकी।
आयोग के अध्यक्ष रवि सुशा और सदस्यों मोली कुट्टी मैथ्यू तथा सजीश के. पी. की पीठ ने 29 सितंबर को जारी अपने आदेश में कंसल्टेंसी और ट्रेवल एजेंसी को अनुचित व्यापार व्यवहार और सेवा में गंभीर कमी का दोषी ठहराया। आयोग ने पाया कि रिक्रूटमेंट फर्मों ने नौकरी का देश बार-बार बदलकर और वीजा प्रक्रिया को अटकाकर आवेदक को जानबूझकर गुमराह किया।
मुआवजे और भुगतान का पूरा ब्योरा
जिला उपभोक्ता आयोग के निर्देश के अनुसार, एर्नाकुलम स्थित कंसल्टेंसी फर्म और उसके प्रबंधकों को वीजा प्रोसेसिंग और टैक्स फाइलिंग के नाम पर ली गई 2.56 लाख रुपये की शेष राशि आवेदक को वापस लौटानी होगी।
इसके अलावा, आयोग ने कंसल्टेंसी, उसके प्रबंधकीय अधिकारियों और संबंधित ट्रेवल एजेंसी को संयुक्त और व्यक्तिगत रूप से आदेश दिया कि वे पीड़ित को मानसिक प्रताड़ना के एवज में 50,000 रुपये का मुआवजा और कानूनी खर्च के रूप में 10,000 रुपये का भुगतान करें। इन सभी देनदारियों को निपटाने के लिए आयोग ने 30 दिनों की मोहलत दी है।
आयोग ने यह भी दर्ज किया कि औपचारिक नोटिस भेजे जाने के बावजूद न तो कंसल्टेंसी और न ही ट्रेवल एजेंसी ने सुनवाई के दौरान अपना लिखित पक्ष प्रस्तुत किया।
देश बदलकर टालमटोल करने का घटनाक्रम
शिकायतकर्ता एक बी.कॉम स्नातक हैं और अपने आश्रित परिवार के भरण-पोषण के लिए विदेश में रोजगार की तलाश कर रहे थे। वह केरल वाटर अथॉरिटी में सब-कॉन्ट्रैक्ट के तहत सुपरवाइजर के रूप में काम करते हैं। अक्टूबर 2023 में कंपनी के एक प्रतिनिधि ने उनसे संपर्क किया और आसान वीजा प्रक्रिया का हवाला देते हुए माल्टा में नौकरी दिलाने का भरोसा दिया। इसके लिए कुल 7.50 लाख रुपये का खर्च बताया गया।
भरोसा करके आवेदक ने 2 नवंबर 2023 को ट्रेवल एजेंसी के खाते में 1 लाख रुपये की शुरुआती रकम ट्रांसफर कर दी। जब कई हफ्तों तक प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ी, तो रिक्रूटर्स ने माल्टा के बजाय लिथुआनिया को बेहतर विकल्प बताते हुए वहां का रुख करने को कहा। करीब छह महीने की देरी के बाद एजेंसी ने एक बार फिर रास्ता बदला और उन्हें ऑस्ट्रिया में काम करने के लिए आवेदन करने की सलाह दी।
ऑस्ट्रियाई वीजा और वर्क परमिट के लिए आवेदक को कंसल्टेंसी के एर्नाकुलम कार्यालय में मूल दस्तावेज जमा करने को कहा गया। इसके बाद आवेदक ने 17 फरवरी 2025 को कंसल्टेंसी को 2.50 लाख रुपये का भुगतान किया और फिर 8 जुलाई 2025 को इनकम टैक्स रिटर्न फाइलिंग के नाम पर एक मैनेजर को 6,000 रुपये अतिरिक्त दिए।
उपभोक्ता फोरम के निष्कर्ष और टिप्पणियां
ट्रेवल एजेंसी ने आखिरकार 3 अक्टूबर 2025 को प्रारंभिक 1 लाख रुपये तो लौटा दिए, लेकिन कंसल्टेंसी के पास जमा 2.56 लाख रुपये वापस नहीं किए गए। इसके बाद पीड़ित ने न्याय के लिए उपभोक्ता आयोग का दरवाजा खटखटाया।
मामले के तथ्यों का विश्लेषण करते हुए आयोग ने कहा कि शिकायतकर्ता ने विदेश में वैध रोजगार मिलने की सच्ची उम्मीद में यह धनराशि दी थी। आयोग ने स्पष्ट किया कि माल्टा से लिथुआनिया और फिर ऑस्ट्रिया तक देशों को लगातार बदलना तथा वीजा अपॉइंटमेंट बार-बार रद्द करना साफ तौर पर दर्शाता है कि विरोधी पक्षों ने शिकायतकर्ता को सुनियोजित तरीके से गुमराह किया।
पीठ ने अपने आदेश में कहा कि 2.56 लाख रुपये वसूलने के बाद भी शिकायतकर्ता को ऑस्ट्रिया में रोजगार उपलब्ध कराने से मुकरना कर्तव्य में गंभीर लापरवाही है। विरोधी पक्षों के इस कृत्य से आवेदक को गहरा मानसिक आघात और भारी वित्तीय नुकसान हुआ है, जिसके निवारण के लिए एजेंसियां सीधे तौर पर उत्तरदायी हैं।

