“मनोबल गिराने वाली” टिप्पणी: इलाहाबाद हाईकोर्ट के जज ने चीफ जस्टिस से कहा- ‘भविष्य में मुझे जमानत याचिकाएं न सौंपें’

लखनऊ: इलाहाबाद हाईकोर्ट (लखनऊ पीठ) में एक अभूतपूर्व घटनाक्रम देखने को मिला है। न्यायमूर्ति पंकज भाटिया ने मुख्य न्यायाधीश (चीफ जस्टिस) से अनुरोध किया है कि भविष्य में उन्हें जमानत रोस्टर (Bail Roster) न सौंपा जाए। जस्टिस भाटिया ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा उनके एक पुराने आदेश पर की गई टिप्पणियों को “मनोबल गिराने वाला और डराने वाला” (Demoralising and chilling effect) बताते हुए यह कदम उठाया है। इसके साथ ही उन्होंने विचाराधीन दूसरी जमानत याचिका पर सुनवाई से खुद को अलग (recuse) कर लिया है।

क्या है पूरा मामला?

यह घटनाक्रम तब सामने आया जब न्यायमूर्ति पंकज भाटिया राकेश तिवारी बनाम उत्तर प्रदेश राज्य मामले में आरोपी की दूसरी जमानत याचिका पर सुनवाई कर रहे थे। सुनवाई के दौरान, उनका ध्यान चेतराम वर्मा बनाम उत्तर प्रदेश राज्य (क्रिमिनल अपील संख्या 770 ऑफ 2026) में सुप्रीम कोर्ट द्वारा पारित एक निर्णय की ओर दिलाया गया। सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला जस्टिस भाटिया द्वारा पारित एक पुराने जमानत आदेश के खिलाफ अपील पर आया था।

सुप्रीम कोर्ट की “चौंकाने वाली” टिप्पणियां

सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में जस्टिस भाटिया के पुराने आदेश पर कड़ी नाराजगी जताई थी। शीर्ष अदालत ने कहा था कि चुनौती दिया गया आदेश “उन सबसे चौंकाने वाले और निराशाजनक आदेशों में से एक है जो हमने पिछले कुछ समय में देखे हैं।”

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सुप्रीम कोर्ट ने आगे कहा था:

“हम यह समझने में असमर्थ हैं कि हाईकोर्ट अपने आदेश के माध्यम से क्या कहना चाहता है। दहेज हत्या जैसे अत्यंत गंभीर अपराध में आरोपी को जमानत देते समय हाईकोर्ट ने किस आधार पर अपने विवेक का इस्तेमाल किया? हाईकोर्ट ने केवल बचाव पक्ष की दलीलों और आरोपी के जेल में बिताए समय को रिकॉर्ड किया और जमानत दे दी।”

सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश की एक प्रति इलाहाबाद हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के समक्ष रखने का भी निर्देश दिया था।

जज पर पड़ा “गहरा असर”

13 फरवरी, 2026 को अपने आदेश में न्यायमूर्ति पंकज भाटिया ने सुप्रीम कोर्ट की इन टिप्पणियों का जिक्र किया। उन्होंने लिखा कि हालांकि यह सर्वविदित है कि किसी भी जज का आदेश पलटा जा सकता है या उसमें हस्तक्षेप किया जा सकता है, लेकिन सुप्रीम कोर्ट के फैसले के पैरा 4 और 29 में की गई विशेष टिप्पणियों का उन पर गहरा प्रभाव पड़ा है।

जस्टिस भाटिया ने आदेश में कहा:

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“फैसले में की गई टिप्पणियों, विशेष रूप से पैरा 4 और 29, ने मुझ पर बहुत ही मनोबल गिराने वाला और डराने वाला (chilling) प्रभाव डाला है।”

रोस्टर बदलने का अनुरोध

इन टिप्पणियों के मद्देनजर, जस्टिस भाटिया ने कहा कि वह वर्तमान जमानत याचिका पर सुनवाई करना उचित नहीं समझते। उन्होंने मामले को मुख्य न्यायाधीश के समक्ष भेजने का निर्देश दिया ताकि इसे किसी अन्य पीठ को सौंपा जा सके।

इसके साथ ही, उन्होंने अपने आदेश में स्पष्ट रूप से लिखा: “माननीय मुख्य न्यायाधीश से यह भी अनुरोध है कि भविष्य में मुझे जमानत रोस्टर (Bail Roster) न सौंपा जाए।”

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