झारखंड हाईकोर्ट ने शुक्रवार को रांची के सुखदेवनगर थाना क्षेत्र स्थित मधुकम में चल रहे मकानों के ध्वस्तीकरण पर रोक लगा दी और टाउन सर्किल अधिकारी को निर्देश दिया कि मामले के न्यायालय में लंबित रहने तक किसी भी प्रकार की कार्रवाई न की जाए।
न्यायमूर्ति राजेश शंकर की अदालत ने यह अंतरिम आदेश रौनक कुमार और मधुकम के अन्य निवासियों द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए पारित किया। याचिकाकर्ताओं ने जिला प्रशासन द्वारा उनके मकानों को एंटी-एनक्रोचमेंट अभियान के तहत तोड़े जाने को चुनौती दी थी।
जिला प्रशासन ने रांची में सरकारी और नगर निगम की जमीन पर कथित अतिक्रमण हटाने के लिए अभियान चलाया था। इस दौरान रतु रोड स्थित मधुकम क्षेत्र में बुलडोजर लगाकर कई मकानों को गिराया गया। प्रशासन के अनुसार 12 मकानों को ध्वस्तीकरण के लिए चिन्हित किया गया था, जिनमें से कुछ आंशिक रूप से तोड़े जा चुके हैं।
इस कार्रवाई से प्रभावित निवासियों ने हाईकोर्ट का रुख किया।
याचिकाकर्ताओं ने अदालत को बताया कि उन्होंने संबंधित जमीन विधिवत पंजीकृत बिक्री विलेख के माध्यम से खरीदी है और उसके बाद मकान का निर्माण किया। उनका कहना था कि उन्होंने यह जमीन ₹5.25 लाख प्रति कट्ठा की दर से खरीदी थी और इसके सभी दस्तावेज रजिस्ट्री कार्यालय में दर्ज हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि वैध दस्तावेज होने के बावजूद बिना विधिक प्रक्रिया अपनाए मकानों को तोड़ा जा रहा है।
अदालत ने पक्षों की दलील सुनने के बाद मधुकम क्षेत्र में आगे की किसी भी तोड़फोड़ पर रोक लगा दी। साथ ही सर्किल अधिकारी को निर्देश दिया कि मामले के लंबित रहने तक वहां के निवासियों पर किसी प्रकार का दबाव न बनाया जाए।
मामले की अगली सुनवाई 27 फरवरी को निर्धारित की गई है।

